पत्रकार हत्या मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन समेत 9 को उम्रकैद की सजा

मुंबई: वरिष्ठ पत्रकार जेडे हत्या मामले में माफिया डॉन छोटा राजन समेत 9 को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सजा सुनाने के अलावा सभी दोषियों पर 26-26 लाख रुपये का भी जुर्माना लगाया है। इससे पहले मकोका के स्पेशल जज समीर अदकर ने इस मामले में सह आरोपी पत्रकार जिग्ना वोरा को बरी कर दिया है, जिस पर हत्या की साजिश रचने के अलावा अन्य कई आरोप थे। बरी किए जाने के तुरंत बाद जिग्ना को अदालत में रोते हुए देखा गया। जोसफ पाउलसन को भी बरी कर दिया गया, जिस पर योजनाबद्ध हत्या के लिए मोबाइल सिम कार्ड मुहैया कराने का आरोप था।
फिलहाल, मामले में मुख्य आरोपी छोटा राजन को बुधवार को हत्या का दोषी करार दिया गया, जिसने मुंबई के जाने-माने अपराध संवाददाता डे की हत्या कराई थी। माफिया डॉन को इंडोनेशिया के बाली से नवंबर 2015 में प्रत्यर्पित किया गया था और बाद में मामले में आरोपी बनाया गया। पिछले साल दिल्ली की एक अदालत ने राजन को फर्जी पासपोर्ट के एक मामले में दोषी करार दिया था और सात साल कैद की सजा सुनाई थी।
यह है मामला
डे (56) एक अखबार के संपादक थे। मुंबई में उनके पोवई आवास के निकट 11 जून 2011 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से 9 दोषी पाए गए हैं। मुंबई के उपनगरीय इलाके में सार्वजनिक स्थान पर दिन दहाड़े डे की क्रूरता से हत्या कर दी गई थी। डे की हत्या के करीब सात साल बाद यह फैसला आया है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह हत्या राजन के इशारे पर की गई थी जो कथित तौर पर उन नकारात्मक खबरों से ‘ नाखुश ’ था जिनके मुताबिक डे उसकी सेहत और अंडरवर्ल्ड में खत्म होती उसकी पैठ पर लिख रहे थे। इस मामले में राजन , गोली चलाने वाला सतीश जोसेफ उर्फ सतीश कालिया और वोरा समेत कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अभियुक्तों में से एक विनोद असरानी की 2015 में मुकदमे के दौरान ही लंबी बीमारी के चलते मौत हो गई थी।
इन्हें मिली सजा
राजन के अलावा इस मामले में सतीश कालिया, अनिल वाघमोडे, अभिजीत शिंदे, नीलेश शेंदगे, अरुण दाके, मंगेश अगवाणे, सचिन गायकवाड़ और दीपक सिसोदिया को सजा सुनाई गई है। आरोपियों के खिलाफ हत्या (302), आपराधिक साजिश (120 बी ) और साक्ष्य नष्ट करने (204) से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और मकोका व आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

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