मुल्लापेरियार बांध से पानी छोड़ने की वजह से बाढ़ के आरोप बेबुनियाद : तमिलनाडु

चेन्‍नई : मुल्लापेरियार बांध से अचानक पानी छोड़ने को बाढ़ की एक वजह बताने के केरल सरकार अारोप के बाद तमिलनाडु सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री ई पलनिसामी ने कहा कि केरल सरकार ने झूठे और बेबुनियादी आरोप लगाये हैं। पलनिसामी ने कहा कि अगर ज्यादा मात्रा में पानी एक बांध से छोड़ा गया तो केरल के दूसरे हिस्सों तक कैसे पहुंचा?’ जबकि इस मामले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर 31 अगस्त तक 139. 9 फीट रखने का आदेश दिया है।
उल्‍लेखनीय है कि केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि तमिलनाडु सरकार द्वारा मुल्लापेरियार बांध से अचानक पानी छोड़ा जाना राज्य में बाढ़ आने का एक प्रमुख कारण है। केरल सरकार ने कहा कि इस बाढ़ से केरल की कुल करीब 3.48 करोड़ की आबादी में से 54 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

केरल सरकार ने कहा है कि उसके इंजीनियरों द्वारा पहले से सचेत किया गया था। इस वजह से राज्य के जल संसाधन सचिव ने तमिलनाडु सरकार में अपने समकक्ष और मुल्लापेरियार बांध की निगरानी समिति को पत्र लिख कर अनुरोध किया था कि जलाशय के जलस्तर को अपने अधिकतम स्तर पर पहुंचने का इंतजार किए बगैर ही इसे छोड़ने की प्रक्रिया नियंत्रित की जाए। उधर इस मामले में पलनिसामी ने कहा कि, 80 बांधों से पानी छोड़ने की वजह से केरल में तबाही आयी। उन्‍होंने कहा कि केरल में बाढ़ आने के एक हफ्ते बाद मुल्लापेरियार बांध से पानी छोड़ा गया था, न कि बाढ़ आने के तुरंत बाद। इसके अलावा तीन चेतावनी भी जारी की गयी थी। एक 139 फीट पर, दूसरी 141 फीट और तीसरी 142 फीट पर।’ उनका कहना है कि बांध से चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा गया था।

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