नकद पैसा देने की बजाय गरीब के अस्थायी राशन कार्ड बनाए सरकार : अभिजीत

नयी दिल्ली : लॉकडाउन के 42वें दिन मंगलवार को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान लोगों को नकद पैसा देने की बजाय अस्थायी राशन कार्ड बनाकर उनको भोजन देना चाहिए और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आर्थिक पैकेज घोषित होना चाहिए। प्रोफेसर बनर्जी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ लम्बी बातचीत में कहा कि उन्हें लगता है कि जब पूरी अर्थव्यवस्था ठप है तो लोगों को नकद पैसा नहीं दिया जाना चाहिए। पैसा सबसे गरीब लोगों की जेब में जरूर जाना चाहिए और इसके लिए लोगों को चिन्हित करने की जरूरत है।
नकदी सिर्फ जरूरतमंद तक ही पहुंचनी चाहिए
उनका कहना था कि निचले तबके की 60 फीसदी आबादी को पैसा देने में कोई बुराई नहीं है लेकिन यदि उन लोगों को पैसा मिलता है जिनको इसकी जरूरत नहीं है तो इसको अनाप शनाप खर्च करेंगे और इससे महंगाई बढेगी। उन्होंने कहा कि नकदी सिर्फ जरूरतमंद तक ही पहुंचनी चाहिए इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि समाज में जो सबसे गरीब है उसके पास नकदी पहुंचे।
अस्थायी राशन कार्ड की जरूरत
उन्होंने कहा ‘हम लोगों को ऐसे ही नकद नहीं दे सकते हैं। जिन लोगों के पास जन धन खाते हैं, वे पैसा प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन बहुत से लोगों के पास नहीं है और विशेष रूप से, प्रवासी श्रमिकों को लाभ नहीं पहुंच सकता। जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा है जो इस लाभ से वंचित है और उनके बारे में भी सोचने की जरूरत है।’ प्रोफेसर बनर्जी ने लोगों की जेब में नकद पैसा पहुंचाने की बजाय उनके पेट तक भोजन पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया और कहा ‘जरूरतमंदों के लिए इस समय अस्थायी राशन कार्ड की जरूरत है इसलिए अन्य राशन कार्ड रोककर अस्थायी राशन कार्ड शुरू किए जाएं ताकि जरूरतमंद को राशन मिले। पहले तीन महीने के लिए और आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ायी जा सकती है।’

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