देशभर में 10 शरियत कोर्ट खोलेगा एआईएमपीएलबी, मौलवियों ने कहा- निकाह हलाला को नहीं दी जा सकती चुनौती

नई दिल्लीः निकाह हलाला के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) अब देशभर के 10 जगहों पर शरियत कोर्ट खोलने की तैयारी कर रहा है। एआईएमपीएलबी ने दलील दी है कि यह कुरान की प्रैक्टिस है और इसे चुनौती नहीं दी जा सकती है। दिल्ली में रिव्यू बैठक के दौरान सभी 40 सदस्यों के बीच मुस्लिमों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में 20 जुलाई से इस पर सुनवाई शुरू होने की संभावना है।
बोर्ड के सेक्रेटरी और लीगल काउंसल जफरयाब जिलानी ने बैठक के बाद कहा कि निकाह हलाला को चुनौती नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि निकाह हलाला एक प्रथा है जिसके तहत अपनी पत्नी को एक बार तलाक दे देने के बाद आप तब तक उससे दोबारा निकाह नहीं कर सकते जब तक वह किसी और से शादी करके उसके साथ रिश्ता नहीं बना लेती और फिर उससे तलाक नहीं ले लेती। यह प्रथा कुरान पर आधारित है और बोर्ड इससे विपरीत विचार नहीं रख सकता है। पैसों के लिए चल रहे निकाह हलाला के रैकेट और महिलाओं के शोषण से जुड़े सवाल पर जिलानी ने कहा‌ कि हलाला के मकसद से किया गया निकाह मान्य नहीं है और आरोपियों को कानून के हिसाब से गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
पहला कोर्ट सूरत में खुलेगा
बोर्ड ने यह भी तय किया है कि देश के 10 शहरों में शरियत कोर्ट बनाए जाएंगे। पहला कोर्ट सूरत में शुरू होगा जिसका उद्घाटन 22 जुलाई को होगा। महाराष्ट्र में 9 सितंबर तक दारुल कजा और नवंबर के अंत तक शरियत कोर्ट का शुरू कर दिया जाएगा। दारुल कजा के केंद्र पारंपरिक रूप से मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एक्ट 1937 के अंतर्गत आने वाले मामलों की सुनवाई करते हैं। ऐसे केंद्रों में लोग शादी और जमीन-जायदाद से जुड़े मामले लेकर पहुंच सकते है। फिलहाल ये सिर्फ मदरसों तक ही सीमित हैं। शरिया का मतलब कुरान और पैगंबर मोहम्मद की सीख के आधार पर तैयार किए गए इस्लामिक कानून से है। जिलानी ने कहा कि अदालतों के असंवैधानिक होने का सवाल ही नहीं उठता है।

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