दुश्मनों के दांत खट्टे करने भारत की जमीन पर उतरें राफेल

नयी दिल्ली : दुनियाभर में महामारी का रूप धारण कर चुके कोरोना वायरस संक्रमण के बीच दुश्मनों के दांत खट्टे करने भारत की जमीन पर  लड़ाकू विमान राफेल उतर गये है। फ्रांस से उड़ान भरने के बाद पांच राफेल लड़ाकू विमान भारतीय जमीन पर पहुंच गए हैं। हरियाणा के अंबाला एयरबेस में राफेल विमान की सुरक्षित लैंडिंग हुई, जहां उनका स्वागत वाटर सैल्यूट के साथ हुआ। इस मौके पर वायुसेनाध्यक्ष आर के एस भदौरिया भी मौजूद रहे। फ्रांस से मिलने वाली राफेल विमानों की ये पहले खेप है। इन विमानों ने मंगलवार को फ्रांस से उड़ान भरी थी, जिसके बाद ये यूएई में रुके थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत में कहा

विमानों के भारत पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत में ट्वीट कर कहा, ”राष्ट्ररक्षासमं पुण्यं, राष्ट्ररक्षासमं व्रतम्, राष्ट्ररक्षासमं यज्ञो, दृष्टो नैव च नैव च.. नभः स्पृशं दीप्तम्…स्वागतम्!” इसका अर्थ है, ‘‘राष्ट्र रक्षा के समान कोई पुण्य नहीं है, राष्ट्र रक्षा के समान कोई व्रत नहीं है, राष्ट्र रक्षा के समान कोई यज्ञ नहीं है, नहीं हैं, नहीं है.’’

एक नए युग की शुरुआत : राजनाथ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा कि  सेना के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत हुई है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राफेल विमानों का भारत आना हमारे सैन्य इतिहास में एक नए युग की शुरुआत है। मुझे बेहद खुशी है कि भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता को सही वक्त पर मजबूती मिली है। अगर किसी को हमारी नयी क्षमता से चिंतित होना चाहिए तो उन्हें होना चाहिए जो हमारी क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डालना चाहते हैं ।

36 में से 5 पहुंचे
फ्रांस से खरीदे जा रहे 36 राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप के पांच विमान अंबाला के वायुसेना एयरबेस पहुंच गये है जहां वायुसेनाध्यक्ष आर के एस भदौरिया उनकी अगुआनी किये। राफेल विमानों की यह पहली खेप है।
59 हजार करोड़ रुपये में हुआ है सौदा
भारत ने फ्रांस से 59 हजार करोड़ रुपये में 36 राफेल विमान खरीदने का सौदा किया है और इस सौदे की पहली खेप में ये विमान प्राप्त हुए हैं। पांचों विमानों ने सोमवार को फ्रांस से उड़ान भरी थी और उसी दिन दस घंटे का सफर तय कर संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे और वहां से उड़ान भर अंबाला पहुंचें है।
यहां होगी तैनाती
अंबाला में राफेल की पहली स्क्वाड्रन तैनात होगी। 17वीं नंबर की इस स्क्वाड्रन को ‘गोल्डन-ऐरोज़‘’नाम दिया गया है जिसमें 18 राफेल लड़ाकू विमान, तीन प्रशिक्षक और बाकी 15 लड़ाकू विमान होंगे।
कड़ी सुरक्षा की गई
पांच राफेल लड़ाकू विमानों के आने के पहले मंगलवार को अंबाला वायु सेना केंद्र के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और निषेधाज्ञा लागू की गई है। अंबाला जिला प्रशासन ने वायुसेना केंद्र के तीन किलोमीटर के दायरे में लोगों के ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
23 सितंबर 2016 को हुआ था करार
भारत ने वायुसेना के लिए 36 राफेल विमान खरीदने के लिए 23 सितंबर, 2016 को फ्रांस की विमानन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी दसॉ एविएशन के साथ 59 हजार करोड़ रुपये का करार किया था। वायुसेना को पहला राफेल विमान पिछले साल अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की फ्रांस यात्रा के दौरान सौंपा गया था।

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