… तो इसलिए फेनी नहीं फैला पाया अपना फन

भुवनेश्वर : प्रचंड चक्रवातीय तूफान फेनी ने शुक्रवार को ओडिशा के तटीय इलाकों को प्रभावित किया। इस दौरान यहां 245 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चली। इस तूफान में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 160 लोग घायल हुए। लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि इतना खतरनाक तूफान होने के बावजूद कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। ऐसे में इसे भारतीय मौसम विभाग और सरकारी एजेंसियों की कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग की मुस्तैदी और बचाव कार्यों के लिए लगी टीमों के तटीय इलाकों से लाखों लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की वजह से ये कामयाबी मिली है। इसके अलावा इस तूफान की भयावहता को कम करने के लिए जिस चीज की तारीफ की जा रही है, वह है राज्य और केंद्र का आपसी सहयोग और इन सबसे ऊपर एनडीआरएफ की टीमों की मुस्तैदी।

कैसे बची सैकड़ों लोगों की जानें

तूफान के प्रभाव को कम करने में भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के नए क्षेत्रीय हरीकेन मॉडल ने बहुत मदद की। इससे यह भी साफ हुआ की 1999 के मुकाबले ऐसे सुपर साइक्लोन को ट्रैक करने और उसके बारे में सटीक जानकारी जुटाने में आईएमडी की क्षमता में बहुत सुधार आया है, क्योंकि ओडिशा में 1999 में आए इसी तरह के सुपर साइक्लोन में करीब 10,000 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं अक्टूबर, 2013 में आए ‘पाइलिन’ और अक्टूबर, 2014 में आए ‘हुदहुद’ चक्रवातीय तूफानों से सफलतापूर्वक निपटने में भी केंद्रीय एजेंसियां और राज्य सरकार सफल रही थीं। इसके बाद इन्होंने बड़े स्तर पर लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालने की रणनीति अपनाई है। इस दौरान समुद्र तटीय क्षेत्रों में बार-बार दी गई चेतावनी और इसके लिए बनाई गई मूलभूत जरूरतों (जैसे तूफान से बचने के लिए बनाए गए बंकर आदि) के चलते तूफान से होने वाली मौतों को कम करने में सफलता मिली थी।

भारी संख्या में मुस्तैद थी एनडीआरएफ की टीमें

ओडिशा की क्षेत्रीय आपदा नियंत्रण संस्थाएं और एनडीआरएफ की टीम तूफान के जमीन से टकराने के वक्त बिल्कुल तैयार थीं, बल्कि एनडीआरएफ ने अब तक की अपनी सबसे ज्यादा टीमें इस काम के लिए तैनात कर रखी थीं। एनडीआरएफ ने अपनी कुल 65 टीमें लगाई थीं। इसकी एक टीम में 45 सुरक्षाकर्मी होते हैं। इनमें से 38 टीमें सिर्फ ओडिशा में थीं। इसके अलावा पिछले तीन दिनों में ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में पहले से ही 11 लाख लोगों को तटीय क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था।

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