सरकार ने किसानों से मांगा 3 दिन का वक्त

  • सीनियर सिटीजंस और बच्चों से घर लौटने की अपील

नई दिल्लीः कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन का आज 10वां और अहम दिन था लेकिन आज की बैठक में भी बात नहीं बनी। किसानों और सरकार के बीच शनिवार को दोपहर करीब सवा दो बजे से शाम तक पांचवें दौर की बातचीत हुई, जो बेनतीजा रही। अब 9 दिसंबर को फिर बात होगी। यह बैठक सुबह 11 बजे से शुरू होगी। किसान नेताओं ने बैठक के बाद कहा कि केंद्र सरकार ने हमें 9 दिसंबर को एक प्रस्ताव देने को कहा है। हम इस प्रस्ताव पर पहले किसानों के बीच चर्चा करेंगे, फिर सरकार के साथ बातचीत शुरू होगी। बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि चर्चा अच्छे माहौल में हुई। हमने कहा है कि एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की व्यवस्था जारी रहेगी। इस पर किसी भी तरह का खतरा नहीं है। इस पर शंका करना बेबुनियाद है। फिर भी किसी के मन में कोई शंका है तो सरकार समाधान के लिए पूरी तरह तैयार है।

कृषि मंत्री बोले

उन्होंने कहा कि एपीएमसी एक्ट राज्य का है और राज्य की मंडी को किसी भी प्रकार से प्रभावित करने का इरादा हमारा नहीं है। कानूनी रूप से भी वह प्रभावित नहीं होगी। एपीएमसी मजबूत हो, इसके लिए सरकार प्रयास करने को तैयार है। इस पर गलतफहमी है तो सरकार समाधान के लिए तैयार है।

सुझाव मिल जाएं तो बेहतर रहेगा- मंत्री तोमर

मंत्री तोमर ने बताया कि आज सभी विषयों पर बात होती रही। हम चाहते थे कि कुछ विषयों पर स्पष्टता से कुछ सुझाव हमें मिल जाएं, लेकिन बातचीत के दौर में ये संभव नहीं हो सका। अब 9 दिसंबर काे दोबारा बैठक होगी। हमने किसानों से कहा है कि सरकार आपके सभी पहलुओं पर विचार कर रही है और हमारी कोशिश होगी कि समाधान का रास्ता हम खोजें लेकिन समाधान का रास्ता खोजने की कोशिश में अगर किसानों से सुझाव मिल जाते तो उचित होगा। हम इंतजार करेंगे। 9 तारीख को सभी की सहमति से तारीख तय की गई है। सर्दी का सीजन है। कोरोना का संकट है, इसलिए बुजुर्गों और बच्चों को किसान नेता घर भेज देंगे तो ठीक रहेगा। हम आश्वस्त करना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार किसानों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध थी, है और रहेगी।

बैठक में भड़क गए किसान

इससे पहले दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई मीटिंग में 40 किसान पहुंचे थे। सरकार से चर्चा के दौरान किसान भड़क गए। उन्होंने कह दिया कि सरकार मांगे पूरी करे, नहीं तो मीटिंग छोड़कर चले जाएंगे। उधर, कृषि मंत्री ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि आप सीनियर सिटीजंस और बच्चों से घरों को लौटने के लिए कहिए।

‘हम एक साल का इंतजाम करके आए हैं’

किसानों ने कहा है कि हम कॉरपोरेट फार्मिंग नहीं चाहते। इस कानून से सरकार को फायदा होगा, किसानों को नहीं। हम पिछले कई दिनों से सड़कों पर हैं। हमारे पास एक साल की व्यवस्था है। अगर सरकार यही चाहती है तो हमें कोई दिक्कत नहीं। हम हिंसा का रास्ता भी नहीं अपनाएंगे। इंटेलीजेंस ब्यूरो आपको बता देगी कि हम धरनास्थल पर क्या कर रहे हैं। इसके साथ ही कहा कि अब और बातचीत नहीं चाहते, सरकार समाधान निकाले। लंच ब्रेक में किसानों ने आज भी सरकारी खाना नहीं, बल्कि अपना लाया हुआ खाना ही खाया। वे पानी तक साथ लाए थे। इससे पहले गुरुवार की बैठक में भी किसान खाना साथ लाए थे। भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने बताया कि सरकार एक ड्राफ्ट तैयार कर रही है। ड्राफ्ट तैयार करने से पहले वह राज्य सरकारों के साथ भी सलाह करेगी। इसके बाद ड्राफ्ट हमें देंगे। उस पर हम सभी किसान चर्चा करेंगे और फिर सरकार से बात करेंगे। एमएसपी पर भी बातचीत हुई है, लेकिन हमने साफ कहा है कि हमें यह कानून नहीं चाहिए। सरकार ये कानून वापस ले। 8 दिसंबर को भारत बंद का आयोजन होगा।रकार की तरफ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश किसानों से बात कर रहे हैं। किसानों की मांग पर सरकार ने पिछली मीटिंग का पॉइंट वाइज जवाब लिखित में सौंप दिया है।

सरकार एमएसपी की लिखित गारंटी देने को राजी
सूत्रों के मुताबिक सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जारी रखने की लिखित गारंटी देने और कृषि बिलों के जिन प्रोविजंस पर किसानों को आपत्ति है, उनमें संशोधन करने को भी तैयार है। लेकिन, किसान तीनों कानून वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। बैठक से पहले किसानों ने कहा कि कृषि कानूनों में बदलाव से काम नहीं चलेगा, सरकार को तीनों कानून वापस लेने चाहिए। इससे पहले किसानों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार अपने 4 मंत्रियों से चर्चा की। मोदी के घर करीब 2 घंटे चली मीटिंग गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल मौजूद थे।

किसान बोले- आज सिर्फ कानून रद्द करने की बात होगी
किसानों ने मीटिंग से पहले कहा कि सरकार बार-बार तारीख दे रही है। ऐसे में सभी संगठनों ने फैसला लिया है कि आज बातचीत का आखिरी दिन है। किसान संयुक्त मोर्चा के प्रधान रामपाल सिंह ने कहा कि आज आर-पार की लड़ाई करके आएंगे, रोज-रोज बैठक नहीं होगी। आज बैठक में कोई और बात नहीं होगी, सिर्फ कानूनों को रद्द करने के लिए ही बात होगी।

 

 

शेयर करें

मुख्य समाचार

दूल्हे के पैसों से की लाखों की शॉपिंग…फिर फरार हो गई ‘बाबू’

लखनऊ : लखनऊ में एक लुटेरी दुल्हन शादी से पहले होने वाले दूल्हे को लाखों रुपये का चूना लगाकर रफू चक्कर हो गई। 16 दिसंबर आगे पढ़ें »

नंदीग्राम में ममता की सभा में लाखों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद

सन्मार्ग संवाददाता खड़गपुर/नंदीग्राम : नये वर्ष के दूसरे सप्ताह से ही तृणमूल सुप्रीमों और राज्य की मुख्यमंत्री जिलों के दौरे पर निकल रहीं हैं और उसकी आगे पढ़ें »

ऊपर