जीएचटीसी-भारत: मोदी ने हल्के मकानों से जुड़ी परियोजनाओं की नींव रखी

नए साल पर 6 राज्यों के 6 शहरों को सौगात
नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को छह राज्यों के छह शहरों में वैश्विक आवासीय प्रौद्योगिकी चुनौती-भारत (जीएचटीसी-भारत) के तहत हल्के मकानों से जुड़ी परियोजनाओं की आधारशिला रखी। मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित एक समारोह में सस्ते और टिकाऊ आवासीय उत्प्रेरक (एएसएचए- इंडिया) के तहत विजेताओं की घोषणा भी की। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को लागू करने में उत्कृष्टता के लिए वार्षिक पुरस्कार भी प्रदान किये।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार का फोकस गरीब और मध्यम वर्ग की जरूरतों पर है तथा शहर में रहने वाले लोगों की संवेदनाओं और भावनाओं को प्राथमिकता दी गयी है। केंद्र सरकार ने पिछले छह सालों में ऐसे कई कदम उठाए हैं, जिनकी वजह से आम आदमी के घर खरीदने के विश्वास को बल मिला है। घरों की कीमतें इतनी ज्यादा हो गयी थीं कि अपने घर का भरोसा टूटने लगा था। एक वजह ये थी कि कानून हमारा साथ देगा या नहीं, हाउसिंग सेक्टर की ये स्थिति थी कि लोगों को शंका थी कि गड़बड़ हो जाने की स्थिति में कानून उनका साथ नहीं देगा। अवसंरचना और निर्माण पर होने वाला निवेश विशेषकर आवासीय योजनाओं पर किया जा रहा खर्च अर्थव्यवस्था में ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ का काम करता है। हल्के मकान की परियोजना के बारे में मोदी ने कहा कि यह आधुनिक तकनीक और नवोन्मेषी प्रक्रिया से बनेंगे और इनके निर्माण में कम समय लगेगा। ये मकान गरीबों के लिए ज्यादा सुविधाजनक होंगे। इन मकानों के निर्माण में फ्रांस, जर्मन और कनाडा जैसे देशों की आधुनिक और अग्रणी प्रौद्योगकि का इस्तेमाल किया जायेगा। ये छह परियोजनाएं वाकई लाइट हाउस यानी प्रकाश स्तंभ की तरह हैं, जो देश में आवासीय निर्माण को नयी दिशा दिखाएंगी।
मोदी ने इस अवसर पर ‘नवारितिह’ के नाम से नवोन्मेषी निर्माण प्रौद्योगिकी पर एक पाठ्यक्रम की शुरुआत की और 54 नवोन्मेषी आवासीय निर्माण प्रौद्योगिकी के एक संग्रह का विमोचन भी किया। इस अवसर पर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अलावा त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री उपस्थित थे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार हल्के मकान से जुड़ी परियोजनाएं देश में पहली बार निर्माण क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नये जमाने की वैकल्पिक वैश्विक प्रौद्योगिकी, सामग्री और प्रक्रियाओं का बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। इनका निर्माण जीएचटीसी-इंडिया के तहत किया जा रहा है। इन मकानों का निर्माण इंदौर, राजकोट, चेन्नई, रांची, अगरतला और लखनऊ में किया जा रहा है। हर जगह एक हजार आवासों का निर्माण किया जाना है। यह निर्माण कार्य एक साल के भीतर पूरा कर लिये जाने की संभावना है।

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