जम्मू-कश्मीर के लिए कल ऐतिहासिक दिन

– राज्य में पहली बार डाले जाएंगे डीडीसी के लिए वोट

श्रीनगरः जम्मू कश्मीर के लिए 28 नवंबर का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है, क्योंकि राज्य में पहली बार मंगलवार को डिस्ट्रिक्ट डवलपमेंट काउंसिल (डीडीसी) के लिए वोट डाला जाएंगे। पिछले साल अनुच्छेद 370 के निरस्त किए जाने के बाद, डीडीसी चुनाव जम्मू और कश्मीर में आयोजित सबसे बड़ी राजनीतिक गतिविधि होगी। पिछले साल भारत सरकार ने जम्मू और कश्मीर से स्पेशल स्टेटस का दर्जा छीनकर उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया था। डीडीसी के चुनाव 28 नवंबर से 22 दिसंबर तक आठ चरणों में होंगे। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर ने इस साल अक्टूबर में पंचायती राज एक्ट, 1989 को अपनाया है।

प्रत्येक जिले में 14 निर्वाचन क्षेत्र

जम्मू-कश्मीर के हर जिले में अब एक डिस्ट्रिक्ट डवलपमेंट काउंसिल होगी, जिसके पास नगर पालिका को छोड़कर पूरे जिले के क्षेत्र पर अधिकार होगा। इस चुनाव के जरिए जम्मू के 10 और कश्मीर घाटी के 10 समेत कुल 20 जिलों में डीडीसी का गठन किया जाएगा। प्रत्येक जिले में 14 निर्वाचन क्षेत्र होंगे। इस प्रकार पूरे जम्मू और कश्मीर में कुल 280 निर्वाचन क्षेत्र के लिए इन चुनावों के माध्यम से लोग डीडीसी के प्रतिनिधियों का चयन करेंगे।

जम्मू-कश्मीर में पहली बार होने जा रहे डीडीसी चुनाव आठ चरणों में होंगे। इनके साथ 13,241 पंचों और सरपंचों की खाली सीटों, साथ ही नगर निगमों में खाली 228 सीटों पर उपचुनाव करवाए जाएंगे। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी सहित गुपकार गठबंधन में शामिल 7 राजनीतिक दल इस चुनाव को मिलकर लड़ रहे हैं।

जिला विकास परिषद के 14 सदस्य सीधे चुने जाएंगे

जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक जिले में जिला विकास परिषद के 14 सदस्य सीधे चुने जाएंगे। यह सदस्य डीडीसी के प्रधान और उपप्रधान का चयन करेंगे और बीडीसी (ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल) चेयरपर्सन का। भविष्य में विधायक भी इसके सदस्य होंगे। निर्वाचित सदस्य ही प्रधान और उपप्रधान चुनाव में वोट डाल पाएंगे। अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए सीटें आरक्षित होंगी। महिलाओं को भी 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।

चुनाव करवाना एक बड़ी चुनौती

इससे पहले जम्मू-कश्मीर राज्य में डिस्ट्रिक्ट डवलपमेंट बोर्ड होते थे, जिसमें एक कैबिनेट मंत्री या एक राज्य मंत्री इसका अध्यक्ष होता था। विधायक और एमलएसी इसके सदस्यों में शामिल होते थे। डिस्ट्रिक्ट डवलपमेंट बोर्ड में विकास कार्यों की प्लानिंग और उन्हें करवाना डिस्ट्रिक्ट डवलपमेंट कमिश्नर द्वारा किया जाता था। राज्य में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार हो रहे हमलों के बीच चुनाव करवाना एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

 

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