जमात-ए-इस्लामी को कारण बताओ नोटिस जारी

श्रीनगर : केन्द्र द्वारा गठित गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) न्यायाधिकरण ने जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुये जबाव मांगा है कि उसे गैर कानूनी क्यों नहीं घोषित किया जा सकता है। इस संगठन पर सरकार ने फरवरी में प्रतिबंध लगा दिया था।
30 दिनों के भीतर कारण बताने को कहा
न्यायाधिकरण के रजिस्ट्रार लोरेन बामनियाल द्वारा जमात-ए-इस्लामी को जारी नोटिस में कहा गया है कि अधिनियम (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) की धारा चार की उप-धारा (2)के तहत एक नोटिस दिया गया है और आपको इस नोटिस के जारी होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर कारण बताना है कि क्यों नहीं संगठन को गैरकानूनी घोषित कर दिया जाये।  न्यायाधिकरण ने जमात को रजिस्ट्रार के कार्यालय में न्यायाधिकरण की अगली सुनवाई से पहले आपत्तियां या जवाबी हलफनामों के जरिये दाखिल करने के लिए कहा है। यह नोटिस पांच अप्रैल को जारी किया गया था।
न्यायाधिकरण का गठन किया था
मालूम हो कि केन्द्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में यह तय करने के लिए एक न्यायाधिकरण का गठन किया था कि जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर को गैरकानूनी संगठन घोषित करने के पर्याप्त कारण हैं या नहीं। गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा 23 मार्च को जारी अधिसूचना में कहा गया था कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गठित किये गये न्यायाधिकरण की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता करेंगी।

गौरतलब है कि सरकार ने 28 फरवरी को अपनी अधिसूचना में जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगा दिया था। पुलवामा में गत 14 फरवरी को आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत के बाद यह कार्रवाई की गई थी।

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