चिनूक वायुसेना में शामिल, रात में भी उड़ सकेगा, पाक सीमा पर तैनात होगा

चंडीगढ़ : भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ की मौजूदगी में चिनूक हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना के बेड़े में सोमवार को शामिल हो गया। इस मौके पर धनोआ ने कहा कि इसके (चिनूक) देश की आसमानी ताकत में और इजाफा होगा। साथ ही यह भारतीय सुरक्षा के लिहाज से ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।

रात में भी सेवा देने में सक्षम

भारतीय वायुसेना में चिनूक हेलीकॉप्‍टरों को शामिल करने के लिए आयोजित समारोह के दौरान एयर चीफ मार्शल ने बताया कि यह हेलीकॉप्टर दिन के अलावा रात में भी सेवा देने में सक्षम है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय धरोहर करार देते हुये कहा कि आज देश कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में यह हेलीकॉप्‍टर न सिर्फ सैन्‍य अभियान में बल्कि विभिन्‍न क्षेत्रों में भी बेहद कारगर साबित हो सकता है।

पड़ोसी मुल्क सीमा पर नहीं आयेगा

धनोआ ने पाकिस्‍तान का जिक्र करते हुये कहा कि ‘जब राफेल आ जाएगा, हमारी वायुसेना की क्षमता कई गुना ज्‍यादा बढ़ जाएगी। हमारी ताकत इतनी हो जाएगी कि वे (पाकिस्‍तान) वे एलओसी या सीमा पर नहीं आएंगे। हमारी क्षमता ऐसी होगी कि आज उनके (पाकिस्‍तान) पास इसका कोई जवाब नहीं है।’

साल 1962 में पहली बार उड़ान भरी

अमेरिकी चिनूक हेलीकॉप्‍टर दुनिया के उन्नत हेलीकॉप्टरों में से एक है। इसने वियतनाम युद्ध से लेकर इराक और अफगानिस्तान तक में इस्तेमाल के दौरान अपनी क्षमताओं को साबित किया है। साल 1962 में पहली बार उड़ान भरने वाले चिनूक को सुरक्षा और उपयोग की दृष्टि से समय के साथ नई तकनीकों से लैस करते हुये अपग्रेड किया गया है।

बहुद्देश्यीय क्षमता से लैस

चिनूक एक डबल इंजन युक्त और एडवांस फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम से लैस हेलीकॉप्टर है। यह करीब साढ़े नौ टन भार वहन करते हुये उड़ान भरने में सक्षम है। युद्ध के समय यह सैन्य हथियारों, वाहनों और सैनिकों को ले जा सकता है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी यह बेहद कामयाब तरीके से इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसके अलावा आपदा के समय राहत कार्यों में काफी मददगार साबित होता रहा है।

बता दें कि चिनूक के आ जाने से सामरिक तौर पर देश के पूर्वोत्तर के इलाकों में मार्गो और कई अन्य संरचनाओं के निर्मा में तेजी आयेगी। भारतीय सीमा सड़क संगठन को काफी समय से इसका इंतजार था।

गौरतलब है कि सरकार ने साल 2015 में कुल 15 चिनूक हेलिकॉप्टरों का ऑर्डर अमेरिकी कंपनी बोइंग को दिया था। इसके अलावा 22 अपाचे हेलीकॉप्‍टर्स की खरीद के लिए अमेरिका के साथ करार किया गया है। दोनों हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिये तकरीबन तीन अरब डॉलर में सौदा किया गया है। देश को 15 चिनूक हेलीकॉप्‍टरों में से फरवरी में चार सैन्‍य हेलीकॉप्‍टर की पहली खेप मिल चुकी है।

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