गुजरात में दूसरों की भूमि पर कब्जा करने को होगी 10 से 14 साल की सज़ा

भूमि अतिक्रमण विरोधी क़ानून लागू: रूपाणी
गांधीनगर: गुजरात भूमि अतिक्रमण (निषेध) अधिनियम 2020 आज से लागू हो गया है जिसमें किसानों तथा सामान्य नागरिकों की भूमि पर अवैध क़ब्ज़ा करने वालों के खिलाफ 10 से 14 साल की सज़ा और भारी भरकम अर्थदंड का प्रावधान है। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने बुधवार को यहां पत्रकारों को बताया कि छोटे किसानों और नागरिकों की ज़मीन पर क़ब्ज़े की समस्या पर कारगर रोक के लिए बने इस क़ानून को राज्यपाल देवव्रत आचार्य ने गत अक्टूबर माह में मंज़ूरी दी थी। इसके तहत हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनायी गयी है, जो प्रत्येक 15 दिन में एक बार बैठक करेगी और शिकायत मिलने से 21 दिनों में भूमि क़ब्ज़े की शिकायत पर कोई निर्णय लेगी। शिकायत सही पाये जाने पर पुलिस को सात दिन के भीतर प्राथमिकी दर्ज करनी होगी और इसके बाद 30 दिन में आरोप पत्र दायर करना होगा। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें होंगी, जो 6 माह में फ़ैसला सुनायेंगी। ऐसी अदालतें स्वत: संज्ञान के आधार पर भी कार्रवाई कर सकती हैं। भूमि पर क़ब्ज़ा ज़माने वालों पर उसकी सरकारी जंत्री क़ीमत के हिसाब से दंड भी वसूला जायेगा। इसमें क़ब्ज़े के लिए असामाजिक तत्वों के साथ ही साथ कम्पनी के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है। इस क़ानून से ऐसे मामलों में आम लोगों को लम्बी क़ानूनी लड़ाई से मुक्ति मिल सकेगी।

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