क्या छूने से कोरोना वायरस संक्रमण फैल सकता है : कोर्ट

मुंबई : हवाई यात्रा के सम्बंध में जन स्वास्थ्य सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने के लिए नागर विमानन मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञों की एक समिति से बंबई उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पूछा कि क्या कोरोना का संक्रमण छूने पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है? न्यायमूर्ति एसजे काथावाला और न्यायमूर्ति एसपी तावड़े का खंडपीठ एअर इंडिया के पायलट देवेन कनानी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। कनानी ने अर्जी में दावा किया है कि विदेश में फंसे हुए लोगों को भारत वापस लाने के दौरान एअर इंडिया बीच वाली सीट खाली नहीं छोड़ रही है। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के वकीलों ने अदालत को 26 मई, 2020 को नागर विमानन सचिव की अध्यक्षता में हुई विशेषज्ञों की समिति की बैठक की चर्चा से अवगत कराया। बैठक में हुई चर्चा के अनुसार, दो लोगों के बीच शारीरिक दूरी अनजाने में शरीर छू जाने से होने वाले संक्रमण के खतरे को कम करती है और यदि आसपास बैठे लोगों को सुरक्षा सूट मुहैया करा दिया जाये तो इससे छूने और सांस लेने पर निकलने वाली बूंदों से होने वाले संक्रमण से बचाव हो सकता है। पीठ ने कहा कि हम विशेषज्ञ समिति से स्पष्टीकरण चाहते हैं कि क्या कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति को छूने मात्र से दूसरा व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है?’ वहीं, गुरुवार को अन्य विमानन कंपनियों स्पाइसजेट, गोएयर और इंडिगो ने भी मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए अपना पक्ष सुनने की भी मांग की। अदालत ने कहा कि वह शुक्रवार को सभी का पक्ष सुनेगी।
कोरोना से अपने बचाव की अंतिम जिम्मेदारी स्वास्थ्य कर्मियों की : केंद्र
नयी दिल्ली : केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से गुरुवार से कहा कि अस्पताल संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण गतिविधियों के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन कोविड-19 से स्वयं का बचाव करने की अंतिम जिम्मेदारी स्वास्थ्यसेवा कर्मियों की है।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि केवल कोरोना वारयस ही नहीं बल्कि अन्य संक्रमणों से बचाव के लिए स्वयं को पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित करना और इसके लिए सभी संभावित कदम उठाना स्वास्थ्यसेवा कर्मियों की जिम्मेदारी है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह के पीठ ने याची डॉ. आरुषि जैन के वकीलों मिथु जैन और अरुण सयाल को केंद्र के शपथपत्र के संबंध में एक सप्ताह में प्रत्युत्तर शपथपत्र दायर करने की अनुमति दी और मामले की सुनवाई 12 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी। डॉ. जैन ने अपनी याचिका में कोविड-19 के मरीजों के उपचार में मदद कर रहे स्वास्थ्यसेवा कर्मियों (एचसीडब्ल्यू) के लिए केंद्र की 15 मई की नयी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर सवाल खड़े किये हैं। इस एसओपी के जरिये केंद्र ने केवल दो श्रेणियों को छोड़कर शेष सभी स्वास्थ्यसेवा कर्मियों के लिए 14 दिनों के क्वारंटाइन की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। एजेंसियां

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