‘वैक्सीन आना हमारे हाथ में नहीं’

नई दिल्लीः राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक लगातार वैक्सीन को लेकर काम कर रहे हैं लेकिन हम वैक्सीन आने का समय तय नहीं कर सकते। वैक्सीन का आना हमारे हाथ में नहीं है और हमें नहीं पता कि कोरोना की वैक्सीन कब तक आएगी। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में कोरोना की स्थिति बेहतर है और राज्य में सभी जरूरी दिशानिर्देशों का पालन हो रहा है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही जीएसटी के बकाए का पैसा दे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी कहा कि कुछ लोग वैक्सीन पर राजनीति कर रहे हैं और मैं लोगों को राजनीति करने से नहीं रोक सकता। इसके अलावा गृहमंत्री अमित शाह ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा कि यूरोप और अमेरिका में जिस गति से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं उसको देखते हुए हमें सतर्क रहना होगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जब अपने राज्य के आंकड़े दे रहे थे तो प्रधानमंत्री मोदी ने बीच मे ही उन्हें रोकते हुए कहा कि मनोहर जी आंकड़े तो पहले ही सामने आ चुके हैं। अब ये बताइए कि आगे इसे रोकने के लिए क्या प्रयास किये जा रहे हैं और क्या किया जाए कि इसका रोकथाम हो।

प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैक्सीन को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है। सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी ट्वीट करके वैक्सीन पर मोदी सरकार से सवाल पूछे थे। राहुल गांधी ने कल ट्वीट करके पूछा था-

  • सभी वैक्‍सीन कैंडिडेट्स में से सरकार कौन सी चुनेगी और क्‍यों?
  • किसे वैक्‍सीन पहले मिलेगी और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन की रणनीति क्‍या होगी?
  • क्‍या मुफ्त टीकाकरण के लिए पीएम केयर्स फंड का इस्‍तेमाल होगा?
  • सभी भारतीयों को कब तक टीका लग जाएगा?

कीमत और डोज तय नहीं है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अभी वैक्सीन की कीमत और डोज तय नहीं है। इस पर काम चल रहा है और व्यवस्था के तहत ही ये आएगी। हमें यह निश्चित करना है कि यह सबसे निचले पायदान तक पहुंचे। हमें कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लापरवाही नहीं बरतनी है। हम मुश्किल के गहरे समुद्र से निकलकर किनारे की तरफ निकल रहे हैं। कहीं ऐसा न हो कि हमारी कश्ती वहीं डूबे, जहां पानी कम था। हमें ऐसा नहीं होना। कोरोना काल में मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ ये 9वीं बैठक है।

कर्नाटक के मंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि भारत विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण को लागू करने के लिए तैयार रहे। टीकाकरण की प्राथमिकता में स्वास्थ्य कर्मचारी, 50 साल से ऊपर के लोग और गंभीर हालत वाले लोग रहेंगे। प्रधानमंत्री ने इसे लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

बैठक की मुख्य बातों पर एक नजर

  • संभली हुई स्थिति में है भारत
    वैक्सीन की स्थिति और वितरण को लेकर जो चर्चाएं हुई हैं, उस पर हमें सिस्टम के तहत आगे बढ़ना होगा। एक समय था कि अंजान ताकत से लड़ने की चुनौती थी। देश के संगठित प्रयासों से इसका सामना किया गया। नुकसान कम से कम रखा गया। रिकवरी और फैटेलिटी रेट के मामले में भारत संभली हुई स्थिति में है। टेस्टिंग और ट्रीटमेंट का बहुत बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
  • अलग चरणों में लोगों का व्यवहार अलग था
    कोरोना के दौरान भारत के लोगों का व्यवहार भी अलग-अलग चरणों में अलग-अलग रहा है। पहले चरण में डर था। दूसरे चरण में भय के साथ संदेह भी जुड़ा। बीमारी की वजह से समाज से कटने का डर भी लगने लगा। लोग संक्रमण को छिपाने लगे। उससे भी हम बाहर आए। तीसरे चरण में काफी हद तक समझने लगे और संक्रमण को बताने लगे। आसपास लोगों को समझाने लगे। गंभीरता भी आने लगी। चौथे चरण में कोरोना से रिकवरी का रेट बढ़ा तो लोगों को लगा कि वायरस कमजोर हो गया, नुकसान नहीं कर रहा है। बीमार हो भी गए तो ठीक हो जाएंगे, इसकी वजह से इस स्टेज में लापरवाही बढ़ गई है।
    त्योहारों से पहले मैंने हाथ जोड़कर प्रार्थना की थी कि कोई दवाई-वैक्सीन नहीं है और आप ढिलाई मत बरतिए। चौथे चरण में जो गलती की हैं, हमें उन्हें सुधारना होगा। हमें तो कोरोना पर ही फोकस करना है।
  • पॉजिटिविटी रेट 5% के दायरे में रखना है
    अब हमारे पास टीम तैयार है। जो-जो चीज तैयार करें, उसे लागू करें। कोरोना बढ़े ना कोई गड़बड़ ना हो। आपदा के गहरे समुद्र से निकलकर हम किनारे की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसा न हो जाए कि हमारी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था। वो स्थिति नहीं आने देनी है हमें। हमें ट्रांसमिशन को कम करने के लिए अपने प्रयासों को और गति देनी होगी। पॉजिटिविटी रेट को 5% के दायरे में लाना ही होगा। फैटेलिटी रेट 1% के दायरे में लाएं।
  • अभी डोज और कीमत का जवाब नहीं है
    वैक्सीन की रिसर्च आखिरी दौर में पहुंची है। भारत सरकार हर डेवलपमेंट पर बारीकी से नजर रख रही है। अभी यह तय नहीं है कि वैक्सीन की एक डोज होगी, दो डोज होगी। कीमत भी तय नहीं है। इन सवालों के जवाब हमारे पास नहीं हैं। जो वैक्सीन बनाने वाले हैं, कॉरपोरेट वर्ल्ड का भी कंपटीशन है। हम इंडियन डेवलपर्स और दूसरे मैन्युफैक्चरर्स के साथ भी काम रहे हैं।
  • प्राथमिकता वैक्सीन सभी तक पहुंचाना
    वैक्सीन आने के बाद यही प्राथमिकता हो कि सभी तक पहुंचे। अभियान बड़ा होगा और लंबा चलने वाला है। हमें एकजुट होकर एक टीम के रूप में काम करना ही पड़ेगा। वैक्सीन को लेकर भारत के पास जैसा अनुभव है, वो बड़े-बड़े देशों को नहीं। भारत जो भी वैक्सीन देगा, वो वैज्ञानिक तौर पर खरी होगी। वैक्सीन वितरण राज्यों के साथ मिलकर खाका रखा गया है। फिर भी ये निर्णय तो हम सब मिलकर करेंगे।
  • वितरण प्रणाली में राज्यों का अनुभव काम आएगा
    हम सब जानते हैं कि हम वैज्ञानिक नहीं हैं। व्यवस्था के तहत जो चीज आती है, उसी को स्वीकार करना होगा। मन में जो योजना हो, खासतौर पर वैक्सीन के संबंध में कि कैसे नीचे तक ले जाएंगे। राज्यों का अनुभव काम आएगा। वैक्सीन अपनी जगह पर है, वो काम होना है और करेंगे। थोड़ी सी भी ढिलाई कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नहीं आनी चाहिए।
  • 4 चरणों में होगा वैक्सीन का वितरण
    देश में 5 वैक्सीन डेवलपमेंट के एडवांस स्टेज में हैं। इनमें से 4 फेज-2 या फेज-3 में हैं। आज की बैठक में वैक्सीन वितरण प्रणाली की स्ट्रैटजी पर चर्चा की गई। सरकार ने इस बारे में काम शुरू कर दिया है कि कोरोना वैक्सीन बाजार में आने के बाद इसका तेजी से और प्रभावी वितरण कैसे किया जाएगा।
    बैठक में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने बताया कि वैक्सीन पहले फेज में स्वास्‍थ्य कर्मचारी और बेहद जरूरतमंदों को दी जाएगी। इसके बाद फ्रंट लाइन वर्कर्स को दी जाएगी। फिर दो चरणों में उम्र के हिसाब से इसका वितरण होगा। यानी 4 चरणों में वैक्सीन दी जाएगी।

सभी राज्य के मुख्यमंत्रियों संग महाबैठक

कोरोना वायरस महामारी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ अहम बैठक की। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन भी मौजूद हैं। कई राज्यों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में यह बैठक अहम है। बैठक में दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में स्थिति कंट्रोल करने को लेकर फोकस रहेगा। प्रधानमंत्री सबसे पहले कोविड-19 से सबसे ज्‍यादा प्रभावित राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों से रूबरू हुए और वहां के हालात की जानकारी ली  और उनकी बात सुनकर जरूरी निर्देश दिए। इसके बाद वे अन्‍य राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों से मुखातिब हुए। कोरोना काल की इस नियमित बैठक में वैक्‍सीन आने से लेकर महामारी की दूसरी संभावित लहर को रोकने पर चर्चा हुई। विदित है कि देश के करीब 10 राज्‍यों में संक्रमण और मौतों का आंकड़ा हाल के दिनों में तेजी से बढ़ा है। यहां पर कोविड-19 को काबू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्‍यमंत्रियों को अलग से निर्देश दिए।
केजरीवाल ने दिल्ली के प्रदूषण को ठहराया जिम्‍मेदार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर के लिए प्रदूषण को जिम्मेदार बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से पराली जलाने के मामले में दखल देने की मांग की। केजरीवाल ने बैठक में कहा कि 10 नवंबर के बाद से दिल्ली में कोरोना के केस घटे हैं। इसके साथ ही केजरीवाल ने कहा कि वह कोरोना के मामले में जरूरी कदम उठा रहे हैं।
कुछ राज्‍यों में लगाना पड़ा है कर्फ्यू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा के लिए अब तक कई बार राज्यों साथ बैठकें कर चुके हैं। देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले पिछले कुछ दिनों से 50,000 के नीचे आ रहे हैं, वहीं कुछ राज्यों में मामले तेजी से बढ़े हैं। कुछ शहरों में तो रात का कर्फ्यू भी लगाया गया है। केंद्र की ओर से लगातार यह प्रयास भी हो रहे हैं कि जब भी कोरोना का टीका उपलब्ध होगा, उसके सुचारू वितरण की व्यवस्था हो सके। भारत में फिलहाल पांच वैक्सीन तैयार होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इनमें से चार परीक्षण के दूसरे या तीसरे चरण में हैं जबकि एक पहले या दूसरे चरण में है।

बैठक में कौन-कौन मुख्यमंत्री शामिल?

  • ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल
  • उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र
  • अरविंद केजरीवाल, दिल्ली
  • अशोक गहलोत, राजस्थान
  • विजय रूपाणी, गुजरात
  • भूपेश बघेल, छत्तीसगढ़
  • मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा

कोरोना पर मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ 9वीं बैठक
देश में 25 मार्च को लॉकडाउन लगने के बाद से प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों के साथ यह 9वीं बैठक है। पिछली बैठक 23 सितंबर को हुई थी। उस बैठक में 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की गई थी।

गौरतलब है कि पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 37,975 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना के कुल मामलों की संख्‍या 91,77,840 लाख हो गई है। इनमें से 86 लाख से अधिक लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 480 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 1,34,218 हो गई। इन 480 लोगों में से 121 लोग राष्ट्रीय राजधानी के हैं। अभी कुल 4,38,667 लोगों का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 4.78 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 86,04,955 लोगों के संक्रमण मुक्त होने के साथ ही, मरीजों के ठीक होने की दर 93.76 प्रतिशत हो गई।

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