केरल के इस मुस्लिम कॉलेज में छात्राओं के बुर्का पहनने पर बैन

नयी दिल्ली : केरल के एक मुस्लिम कॉलेज की छात्राएं अब बुर्का पहनकर पढ़ने नहीं जा पायेंगी क्योंकि गुरुवार को एक सर्कुलर जारी करते हुये कॉलेज ने छात्राओं के चेहरा ढंकने पर रोक लगा दी है। मालूम हो कि मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी संभवतः देश का ऐसा पहला मुस्लिम शैक्षणिक संस्‍थान है जिसने बुर्का पहनने पर रोक लगाई है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा-बैन की कोई जरूरत नहीं है

श्रीलंका में गत दिनों हुये धमाकों के बाद वहां ‌कि सरकार ने महिलाओं के हिजाब पहनने पर रोक लगाने की घोषणा की थी। शिवसेना ने बुधवार को अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में भी बुर्का पर बैन लगाने की मांग की थी। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने ‘सामना’ के संपादकीय पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुये कहा था कि इस तरह के बैन की कोई जरूरत नहीं है। वहीं शिवसेना ने श्रीलंका में बुर्का पर पाबंदी लगाये जाने का समर्थन करते हुए सवाल किया था कि जब यह रावण की लंका (श्रीलंका) में आ चुका है, तो यह राम की अयोध्या में कब आएगा।

बुर्का पहने लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा है कि ‘फ्रांस में भी आतंकवादी हमला होते ही वहां की सरकार ने बुर्काबंदी की। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में भी यही हुआ। फिर इस बारे में हिंदुस्तान पीछे क्यों? शिवसेना के अनुसार वह इस तरह की मांग इसलिये कर रही है ताकि सुरक्षाबलों को किसी को पहचानने में परेशानी न हो। साथ ही यह भी दलील दी कि बुर्का या नकाब पहने लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा हो सकते हैं।

सबको अपनी पसंद की चीजें चुनने का अधिकार

वहीं शिवसेना की बुर्का पर प्रतिबंध की मांग वाले बयान का विरोध करते हुये ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह हमारे संविधान में फंडामेंटल राइट है। साथ ही उनका कहना था कि देश के संविधान के अनुसार सबको अपनी पसंद की चीजें चुनने का अधिकार है।

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