कांग्रेस को जब भी कुर्सी जाने का डर होता है, वह देश में डर का माहौल बनाना शुरू कर देती हैः नरेंद्र मोदी

गृह मंत्रालय ने पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर जारी की नई गाइडलाइंस

कांग्रेस 400 से 44 पर आ गई तो ईवीएम पर सवाल उठने लगे

मुंबईः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को मुंबई दौरे पर हैं। यहां पीएम मोदी ने पार्टी के आपातकाल के विरोध में भाजपा के काला दिवस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ‘जब भी कांग्रेस को कुर्सी जाने का डर होता है, वह देश में डर का माहौल बनाना शुरू कर देती है। इनके नेता ये कहना शुरू कर देते हैं कि देश तबाह हो रहा है और देश को हम ही बचा सकते हैं। इनके लिए मूल्य, परंपराएं, देश, संविधान कुछ मायने नहीं रखता।’ कांग्रेस की आलोचना मात्र करने के लिए हम काला दिन नहीं मनाते। हम देश और भावी पीढ़ी को जागरूक करना चाहते हैं। हम स्वयं को भी संविधान के प्रति समर्पित रखने के लिए इसे याद करते हैं।

सुरक्षा को लेकर जारी की नई गाइडलाइंस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रमों और रोड शो के दौरान आम लोगों के बेहद करीब पहुंच जाते हैं। कई बार लोग भी उनसे हाथ मिलाने या कोई उपहार देने के लिए पहुंच जाते हैं। ऐसा पिछले दिनों कई बार देखने को मिला। लेकिन आने वाले दिनों शायद पीएम मोदी के ऐसे दृश्‍य दिखाई ना दें। गृह मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। मंत्रालय के सूत्रों ने इसका खुलासा किया है। उन्‍होंने बताया कि राज्‍यों की गृह मंत्रालय द्वारा सभी राज्‍यों को ये गाइडलाइंस पहले ही भेजी जा चुकी हैं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बैठक के बाद ये निर्णय लिया कि पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को और चाक-चौबंद करने की आवश्‍यकता है। ये बैठक जून के पहले सप्‍ताह में उनके आवास पर हुई, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा और खुफिया ब्यूरो के निदेशक राजीव जैन ने भाग लिया था।

विरोध करने वालों को कर ‌दिया था कैद
आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीने के लिए लगाया गया था। उस वक्त इंदिरा गांधी की सरकार थी। इस दौरान नागरिक अधिकारों को खत्म कर दिया गया था। इसका विरोध करने वालों को कैद कर लिया जाता था।
ऐसा उदाहरण शायद ही कहीं मिले
प्रधानमंत्री ने कहा लोकतंत्र के प्रति समर्पण को बार-बार याद करना चाहिए। ये अपने आप में संस्कार है। आज की पीढ़ी को पूछा जाए कि आपातकाल कैसा था? वो उस बारे में ज्यादा नहीं बता पाएगा। दरअसल प्यासे को पता होता है कि पानी न मिलने की तड़पन कैसी होती है। देश ने कभी सोचा तक नहीं था कि सत्ता सुख और परिवार की भक्ति के प्रति समर्पित लोग देश को सलाखों में बंद कर देंगे। लोगों को बताया जाता था कि तुम्हारा नाम मीसा में है और जल्द ही दरवाजे पर पुलिस आने वाली है। संविधान का दुरुपयोग कैसे किया जा सकता है, ऐसा उदाहरण शायद ही कहीं मिले।

ईवीएम पर भी उठाये गए सवाल

आपातकाल में कांग्रेस की मानसिकता और इस समय संसद में मुख्य न्यायाधीश पर महाभियोग लाना दिखाता है कि उनकी मानसिकता में कोई अंतर नहीं आया है। दुनिया हमारे चुनाव आयोग पर गर्व करती है। सबने राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद चुनाव आयोग की भूमिका की सराहना की है, उसे ताकतवर बनाने की बात कही। जब वे (कांग्रेस) 400 से 44 पर आ गए तो ईवीएम पर सवाल उठाने लगे। क्या इनके रहते लोकतंत्र-संविधान सुरक्षित रह सकता है?

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