कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष चयन का संकट, थरूर ने कहा-तैयार हूं

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी के सामने सदन में नेता प्रतिपक्ष के चयन का संकट खड़ा हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि चुनाव में पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई दिग्गजों को अपनी सीट गंवानी पड़ी है। राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश को लेकर भी संशय की स्थिति बरकरार है। कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी में से कोई नेता का पद संभालेगा या नहीं? यह भी स्पष्ट नहीं है। इस बीच  शशि थरूर ने अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाने की इच्छा जताई है।

राहुल के दल के नेता बनने की संभावना
सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में राहुल का कांग्रेस का नेता बनना मुश्किल है। ये जिम्मेदारी पिछली बार की तरह किसी और को सौंपी जा सकती है। फिर भी राहुल के कांग्रेस संसदीय दल का नेता बनने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

वरिष्ठ और युवा नेताओं की कमी

पार्टी वरिष्ठ और युवा नेताओं की कमी से जूझ रही है। तिरुअनंतपुरम से शशि थरूर, बहरामपुर से अधीर रंजन चौधरी और आनंदपुर साहिब से मनीष तिवारी ने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की है। इस वजह से यह भी चर्चा है कि इन्हीं में से किसी एक को सदन में नेता बनाया जा सकता है। 1999 से सदन के सदस्य रहे चौधरी इन नेताओं में सबसे अनुभवी हैं जबकि मनीष तिवारी पिछली बार लोकसभा सदस्य नहीं थे।

अतिरिक्त जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं

इस बीच शशि थरूर ने कहा है कि ‘‘सदन में पार्टी की स्थिति को लेकर तो मैं कुछ नहीं बोल सकता हूं। मगर हां, मैं अतिरिक्त जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं। मुझ पर सदन में पार्टी की ओर से बात करने की जिम्मेदारी है। मैं पिछले कुछ सालों से ऐसा करता आ रहा हूं। ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाने में मुझे खुशी ही होगी।’’

विपक्ष के नेता के लिए सदन में 10 फीसदी सीटें अनिवार्य

नियम है कि विपक्ष का नेता उसी पार्टी से हो सकता है जिसकी सदन में कम से कम 10 फीसदी सीटें हों। पिछले लोकसभा की तरह इस लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को पर्याप्त सीट नहीं मिली हैं। हालांकि इस बार उसे 52 सीटें ‌हासिल हुईं हैं फिर भी परंपरा के मुताबिक, विपक्ष के नेता पद के लिए पार्टी के पास 55 सीटें होना जरूरी हैं। वहीं किसी अन्य दल के पास भी 55 का आंकड़ा नहीं है। ऐसे में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण कांग्रेस नेता ही विपक्ष का नेतृत्व कर सकता है।

गौरतलब है कि 16वीं लोकसभा में कांग्रेस को सिर्फ 44 सीटों पर जीत मिली थी। विपक्ष में सबसे बड़ा दल होने के कारण कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए विपक्ष के नेता का पद मांग रही थी।

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