कर्नाटक के बाद अब गोवा में भी कांग्रेस के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

नई दिल्लीः लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस पार्टी को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। इस्तीफों के लगातार चल रहे इस दौर ने कर्नाटक के बाद अब गोवा जैसे राज्य में भी पार्टी के अस्तित्व को खतरे में ला खड़ा किया है। बुधवार को गोवा में कांग्रेस पार्टी के 15 में से 10 विधायकों ने सत्ताधारी पार्टी भाजपा से हाथ मिला लिया, जिससे कांग्रेस का सियासी संकट और गहरा गया है।

बता दें कि, कर्नाटक और गोवा में कांग्रेस पार्टी पर आयी मुसीबत को लेकर बुधवार को संसद के बाहर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्षी पार्टियों का मानना है कि इन दोनों राज्यो में सियासी संकट के लिए भाजपा जिम्मेदार है।

कांग्रेस में सियासी भूचाल

पिछले दिनों कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधंन के 14 विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से ही पार्टी में सियासी भूचाल मचा हुआ है। इसी राजनीतिक उठा-पटक के बीच भापजा ने सेंधमारी करके गोवा कांग्रेस के 10 विधायकों को अपने खमे में शामिल कर लिया है। अब कांग्रेस के पास गोवा में केवल 5 विधायक बचे हैं। नेता विपक्ष चंद्रकांत कावलेकर के नेतृत्व में इन विधायकों ने पार्टी से मुह मोड़ लिया है। आज यानि गुरुवार को इन 10 विधायकों की मुलाकात गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के साथ गृह मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से होनी है।

भाजपा विधायकों की संख्या बढ़ी

गोवा में पार्टी की इस हालत का जिम्मेदार कावलेकर ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद और निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्य नहीं होने को ठहराया है। ऐसे राजनैतिक घटनाक्रम के बाद गोवा विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या में इजाफा हो गया है। 17 से बढ़कर ये आंकडा अब 27 पर पहुंच गया है। जिन दस विधायकों ने भाजपा का दामन थामा है उनमें चंद्रकांत कावलेकर, इसीडोर फर्नाडिस, फ्रांसिस सिलवेरा, फिलिप नेरी रोड्रिगेज, जेनिफर एवं अतानासियो मोनसेराते, अंतोनियो फर्नाडिस, नीलकंठ हालारंकर, कलाफासियो डॉयस और विल्फ्रेड डी सा का नाम शामिल है।

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