ओडीएफ गांवों की तुलना में गैर ओडीएफ गांवों का भूजल 12 गुना दूषित

नई दिल्लीः स्वच्छता के प्रयासों में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन को आज वैश्विक स्तर पर सराहना मिल रही है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) के अध्ययन में पाया गया है कि स्वच्छ भारत अभियान से भूजल प्रदूषण में कमी आई है। इस अध्ययन के अनुसार जिन गांवों को खुले में शौच मुुक्त (ओडीएफ) घोषित नहीं किया गया है वहां का भूजल 12.7 प्रतिशत, मिट्टी में 1.13 प्रतिशत, खाने-पीने की वस्तुओं में 1.48 प्रतिशत और पीने के पानी में 2.68 प्रतिशत ज्यादा प्रदूषण पाया गया।

जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्वच्छ भारत अभियान से संबं‌धित यूनीसेफ और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की रिपोर्ट को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर बुधवार को प्रकाशित किया। इस बाबत शोध के लिए बिहार, बंगाल और ओडिशा में ओडीएफ और नॉन ओडीएफ गांवों से भूजल के 12-12 नमूने लिए गए।

5 लाख 62 हजार गांव हुए ओडीएफ मुक्त

शेखावत ने बताया‌ कि देश के लगभग 5 लाख 62 हजार गांव खुले में शौच मुक्त घोषित हो चुके हैं। आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम और अंडमान निकोबार ओडीएफ की 100 प्रतिशत वाली श्रेणी में आते हैं। जबकि बिहार, बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना और गोवा इस मामले में पीछे हैं।

बता दें कि पिछले साल हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक अध्ययन के मुताबिक, स्वच्छ भारत मिशन की वजह से तीन लाख लोगों की जान बच गई। नए मंत्रालय के तहत सरकार अब गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने पर काम करेगी। इसके लिए घर-घर नल से जल योजना लाई जा सकती है।

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