इसरो करेगा रडार से लैस आरआईएसएटी-2बी का प्रक्षेपण

चेन्नई : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) सिंथेटिक अर्पचर रडार से लैस (एसएआर)आरआईएसएटी-2बी उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा। लांच व्हीकल पीएसएलवी-सी46 से छोड़ा जाने वाला उपग्रह पृथ्वी की निगरानी करेगा। अंतरिक्ष से पृथ्वी की निगरानी क्षमता को और विकसित करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी निकट भविष्य में कम से कम छह और ऐसे उपग्रहों का प्रक्षेपण करने की योजना बना रही है।
उल्टी गिनती कल शुरु होने की उम्मीद
इसरो सूत्रों ने सोमवार को बताया कि उपग्रह का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से बुधवार सुबह पांच बजकर 27 मिनट पर फर्स्ट लांच पैड से किया जाएगा और फिर 300 किलोग्राम आरआईएसएटी-2बी को भूमध्यरेखा से 37 डिग्री के झुकाव के साथ पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया जाएगा। मिशन रेडीनेस रिव्यू कमेटी की बैठक के बाद लांच ऑथोराइजेशन बोर्ड प्रक्षेपण के लिए मंजूरी देगा। प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती कल शुरु होने की उम्मीद है और इस दौरान 44.4 मीटर लंबे लांच व्हीकल में प्रणोदक भरने का काम होगा।
दिन-रात, बारिश-बादल में भी निगरानी में सक्षम
तीन सौ किलोग्राम आरआईएसएटी-2बी इसरो के आरआईएसएटी कार्यक्रम का चौथा चरण है और इसका इस्तेमाल रणनीतिक निगरानी और आपदा प्रबंधन के लिए किया जाएगा। यह उपग्रह एक सक्रिय एसएआर (सिंथेटिक अर्पचर रडार) से लैस है बादल छाये रहने या अंधेरे में ‘रेगुलर’ रिमोट-सेंसिंग या ऑप्टिकल इमेजिंग उपग्रह पृथ्वी पर छिपे वस्तुओं का पता नहीं लगा पाता है जबकि एक सक्रिय सेंसर ‘एसएआर’ से लैस यह उपग्रह दिन हो या रात, बारिश या बादल छाये रहने के दौरान भी अंतरिक्ष से एक विशेष तरीके से पृथ्वी की निगरानी कर सकता है।

बता दें कि सभी मौसम में काम करने वाले इस उपग्रह की यह विशेषता इसे सुरक्षा बलों और आपदा राहत एजेंसियों के लिये विशेष बनाती है।

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