आश्रय गृह केस में ब्रजेश ठाकुर समेत 19 दोषी करार

दिल्ली की अदालत अब सजा को लेकर 28 जनवरी को करेगी सुनवाई, अभियुक्तों में 12 पुरष व 8 महिलाएं
नयी दिल्ली/पटनाः मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले में कई लड़कियों के यौन शोषण एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए दिल्ली की एक अदालत ने ब्रजेश ठाकुर समेत 19 अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने ठाकुर को पॉक्सो कानून के तहत गुरुतर लैंगिक हमला और सामूहिक बलात्कार का दोषी ठहराया। अदालत ने मामले के एक आरोपी को बरी कर दिया। आरोपियों में 12 पुरुष और आठ महिलाएं शामिल थीं। आश्रय गृह ठाकुर द्वारा चलाया जा रहा था।
गौरतलब है कि ठाकुर ने 2000 में मुजफ्फरपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से बिहार पीपुल्स पार्टी (बिपीपा) के टिकट पर चुनाव लड़ा था और हार गया था।

10 वर्ष की सजा व आजीवन कारावास
सीबीआई के आरोपपत्र में आरोपियों पर बलात्कार और बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम (पॉक्सो) के तक आरोप लगाए। इस कानून के तहत दोषियों को कम से कम 10 वर्ष की सजा और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। अदालत ने इस मामले में दोषियों को सुनाई जाने वाली सजा पर दलीलों को सुनने के लिए 28 जनवरी की तारीख तय की है।

30 मार्च 2019 को लगे थे आरोप
अदालत ने 30 मार्च, 2019 को ठाकुर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ बलात्कार और नाबालिगों के यौन शोषण का आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप तय किए थे। अदालत ने बलात्कार, यौन उत्पीड़न, नाबालिगों को नशा देने, आपराधिक धमकी समेत अन्य अपराधों के लिए मुकदमा चलाया था। ठाकुर और उसके आश्रय गृह के कर्मचारियों के साथ ही बिहार के समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, ड्यूटी में लापरवाही और लड़कियों के उत्पीड़न की जानकारी देने में विफल रहने के आरोप तय किए गए थे। इन आरोपों में अधिकारियों के प्राधिकार में रहने के दौरान बच्चों पर क्रूरता के आरोप भी शामिल थे जो किशोर न्याय कानून के तहत दंडनीय है। अदालत ने सीबीआई के वकील और मामले के 20 आरोपियों की अंतिम दलीलों के बाद 30 सितंबर, 2019 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में बिहार की समाज कल्याण मंत्री और तत्कालीन जद (यू) नेता मंजू वर्मा को भी आलोचना का शिकार होना पड़ा था जब उनके पति के ठाकुर के साथ संबंध होने के आरोप सामने आए थे। मंजू वर्मा ने आठ अगस्त, 2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

टिस के रिपोर्ट से हुआ था खुलासा
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर इस मामले को सात फरवरी, 2019 को बिहार के मुजफ्फरपुर की स्थानीय अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर की पॉक्सो अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था। यह मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) द्वारा 26 मई, 2018 को बिहार सरकार को एक रिपोर्ट सौंपने के बाद सामने आया था। इस रिपोर्ट में किसी आश्रय गृह में पहली बार नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न का खुलासा हुआ था।

अभियुक्तों का नाम
इस मामले में ठाकुर के अलावा बाल संरक्षा इकाई की तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी, तत्कालीन बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन, बाल कल्याण समिति के पूर्व अध्यक्ष दिलीप वर्मा, सदस्य विकास कुमार, बालिका गृह कर्मचारी मीनू देवी, मंजू देवी, इंदु कुमारी, नेहा कुमारी, चंदा देवी, हेमा मसीह, किरण कुमारी,विजय कुमार तिवारी, गुड्डू कुमार पटेल, किशन राम उर्फ कृष्णा, डॉ अश्विनी उर्फ आसमानी, रामानुज ठाकुर, विक्की, रामाशंकर और साइस्ता परवीन उर्फ मधु शामिल हैं।

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