सन्मार्ग एक्सक्लूसिव :आर्थिक पैकेज से हर वर्ग को राहत, न अन्न की कमी, न धन की : ठाकुर

 विशेष संवाददाता, कोलकाता : कोविड-19 संकट के आघात से देश और देश की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए केंद्र सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है। भले ही विदेशी एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा रही हों, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास जताया है कि भारत की अर्थव्यवस्था फिर से उड़ान भरने को तैयार है। उनके इस विश्वास के पीछे वित्त मंत्रालय का 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज और सुधारात्मक व राहत के कदम हैं। कोविड-19 से जंग, अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और आत्मनि​र्भर भारत के बारे में वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सन्मार्ग से विशेष बातचीत की।
प्र. : प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कोविड-19 से जंग को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर : भारत ने लॉकडाउन का पूरा पालन किया, इसलिए हम सफल रहे। दुनिया के अगर 15 देशों में सबसे ज्यादा कोरोना के केस हैं, उनकी कुल आबादी भारत के बराबर है मगर वहां मृत्युदर 83 गुना ज्यादा है और पॉजिटिव केस 34 गुना ज्यादा हैं। यह मोदीजी के नेतृत्व में 130 करोड़ भारतीयों ने एकजुट होकर कोविड से लड़ाई लड़ी है।
प्र. : प्रधानमंत्री मोदी ने जीडीपी के 10 फीसदी यानी 20 लाख करोड़ रुपये के अब तक के सबसे बड़े राहत पैकेज की घोषणा की। लेकिन कांग्रेस कह रही है यह पैकेज जीडीपी का 1.6 प्रतिशत यानी सिर्फ 3.22 लाख करोड़ रुपये का है…?
उत्तर : विपक्ष ने 5 प्रतिशत जीडीपी के पैकेज की मांग की थी। हमने 10 प्रतिशत दिया उसमें भी अलग-अलग विषय निकालने लगे। आपदा के समय में वो झूठी आलोचना तक सीमित हो गये। जैसे दुनियाभर के देशों ने पैकेज का प्रतिशत निकाला, वैसे ही हमने नापा है। हमने लगभग 53 हजार करोड़ रुपए 41 करोड़ लोगों के खातों में अब तक पहुंचाये। हजारों करोड़ रुपए ब्याज की किस्त 6 महीने तक ना भरने की छूट दी। नए ऋण बिना गारंटी के सरकार ने उपलब्ध कराए। समाज के सभी वर्गों को इस 20 लाख करोड़ के पैकेज से कुछ ना कुछ देने का जरूर प्रयास किया है।
प्रश्न : विपक्ष इस पैकेज से खुश नहीं है। कुछ आर्थिक शोध एजेंसियों ने भी कहा है कि ग्राहकों के हाथ में सीधे पैसे देना ज्यादा सही रहता?
उत्तर : 20 करोड़ से ज्यादा महिला जनधन खाता धारकों को 21 हजार करोड़ रुपए पिछले 2 महीने में दिए गए। 9 करोड़ किसानों को 18 हजार करोड़ दिए गए। 2.82 करोड़ वृद्ध, विधवा, दिव्यांगों को 2800 करोड़ तथा 7 करोड़ से ज्यादा लोगों को उज्ज्वला गैस की रिफ़िलिंग के लिए 9000 करोड़ दिए। कर्मचारी भविष्य निधि में कर्मचारी और नियोक्ता के 12-12% हिस्से का हजारों करोड़ रुपये मोदी जी द्वारा दिया गया। इंटरेस्ट सबवेंसन 4% तक दुग्ध उत्पादकों को मोदी जी द्वारा उपलब्ध करवाया जा रहा है। टीडीएस टीसीएस में 25% कटौती से 50,000 करोड़ की लिक्विडिटी बढ़ेगी। तीन महीने तक जीएसटी की रिटर्न ना फाइल करने की छूट भी दी। 80 करोड़ लोगों को 5 किलो गेहूं, चावल, दाल 5 महीने के लिए अतिरिक्त दिया है। आर्थिक पैकेज से हर वर्ग को 8 करोड़ प्रवासी मज़दूरों को भी दो महीने का राशन दिया जा रहा है। अन्न और धन की कहीं कोई कमी नहीं है।
प्रश्न : इस पैकेज में मध्यम वर्ग के लोगों के लिए क्या है?
उत्तर : सबसे पहले तो मध्यम, सूक्ष्म, लघु और कुटीर उद्योग के लिए 3 लाख करोड़ रुपए के अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल का प्रावधान बिना गारंटी और कोलैटरल के किया गया है। बैंकों से 20% अतिरिक्त कार्यशील पूंजी एमएसएमई को कम ब्याज दर पर मोदी सरकार दे रही है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत तनावग्रस्त एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ रुपये का सबोर्डिनेट ऋण दिया जाएगा, जिसका सीधा लाभ 2 लाख से ज्यादा एमएसएमई को मिलने वाला है। कम्पनी में 15% इक्विटी के बराबर, अधिकतम 75 लाख रुपए एक व्यक्ति को और 50,000 करोड़ रुपए इक्विटी इंन्फ्यूजन के लिए अलग से सरकार ने प्रावधान किया है। घर लेने वालों के लिए क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम 2021 तक बढ़ा दी। बैंकों की किस्त 6 महीने तक ना भरने की छूट दे दी। 17 लाख लोगों को 27,000 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स रिफंड मात्र 45 दिन में हुआ है। इनसाल्वेंसी बैंकरप्सी कोड की कार्रवाई करने की सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ कर दिया गया। ऐसे बहुत सारे कदम उठाए गए जो मध्यम वर्ग के हित में हैं।
प्रश्न : कोरोना से सर्विस सेक्टर और पर्यटन एवं होटल उद्योग पर भारी मार पड़ी है। इनके लिए कुछ…?
उत्तर : 3 लाख करोड़ रुपए का कोलैटरल फ्री लोन जो एमएसएमई को मिलेगा वो सिर्फ एमएसएमई नहीं, बल्कि छोटे दुकानदारों, व्यापारियों व व्यवसायियों के लिए भी है, जिसका लाभ सभी पात्रों को मिलेगा। एमएसएमई की परिभाषा भी बदली गई है जिसका लाभ इनको मिलेगा।
प्रश्न : लोकल और आत्मनिर्भर भारत के नारे के बीच विदेशी निवेश लाने पर भी जोर है। लोग अगर लोकल को ही बढ़ावा देंगे तो विदेशी निवेशक क्यों आएंगे?
उत्तर : आज से 6 साल पहले मोदीजी ने कहा था कि हमारा सबसे ज्यादा खर्च तेल और गैस के आयात पर होता है, उसके बाद इलेक्ट्रॉनिक गुड्स पर होता है। लोकल के लिए वोकल, लोकल से ग्लोबल यह हमने एक रोडमैप तैयार किया है आत्मनिर्भर भारत के लिए जिसमें स्थानीय प्रोडक्शन को बल मिले। आज 130 करोड़ भारतीयों के कारण बड़ी मार्केट यहां है। 2014 से पहले भारत इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का दूसरा सबसे बड़ा आयातक था। आज मोदीजी की नीतियों के कारण भारत मात्र 4-5 वर्षों में मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। लाखों लोगों को रोजगार भी मिला। वे मोबाइल यहां भी बिकते हैं, निर्यात भी होते हैं। हम अपना आयात घटाकर निर्यात बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। विदेशी कंपनियां निवेश करेंगी तो हमारा लोकल प्रोडक्ट होगा, उनको तकनीकी जानकारी मिलेगी और आगे बढ़ने का बल मिलेगा और यहां से उसको निर्यात करने के अवसर भी मिलेंगे। आत्मनिर्भर भारत का सपना 130 करोड़ भारतीयों को मिलकर पूरा करना है।
प्रश्न : अम्फान के शिकार पश्चिम बंगाल को केंद्र सरकार कैसे मदद कर रही है?
उत्तर : कोविड से निपटने के लिए एसडीआरएफ का 11 हजार करोड़ रुपया एडवांस में ही राज्यों को दे दिया। पश्चिम बंगाल और ओडिशा ने अम्फान का कहर झेला है। समय रहते लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। हमने एनडीआरएफ के कार्य सराहनीय रहे। प्रधानमंत्री मोदी जी में बंगाल में राहत एवं पुनर्वास के लिए 1 हजार करोड़ रुपए बंगाल व 500 करोड़ रुपए ओडिशा को दिए हैं। जल्द ही केंद्र की टीम अम्फान से हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी। राज्य के हित के लिए ज़रूरी हर कदम उठाए जायंगे। केंद्र सरकार बंगाल की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।

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