आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने दिया इस्तीफा

नयी दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल पूरा होने में 6 महीने बाकी थे। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। आचार्य से पहले दिसंबर 2008 में आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने भी सरकार के साथ मतभेद के बाद अपना कार्यकाल पूरा होने से 9 महीने पहले इस्तीफा दे दिया था।
जनवरी 2020 में पूरा होना था कार्यकाल
सितंबर 2016 में पटेल को गवर्नर के तौर पर पदोन्नत किये जाने के बाद, आचार्य 23 जनवरी 2018 में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर बनाए गए थे। वे भारतीय रिजर्व बैंक की फाइनेंशियल मार्केट रेग्युलेशन डिपार्टमेंट ,फाइनेंशियल स्टेबिलिटी यूनिट, मॉनेटरी पॉलिसी डिपार्टमेंट, फाइनेंशियल मार्केट ऑपरेशन डिपार्टमेंट, डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च के प्रमुख भी हैं। डिप्टी गवर्नर के पद पर उनका 3 साल का कार्यकाल जनवरी 2020 में पूरा होना था।
केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से समझौता
दरअसल, पूर्व आबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने भी पिछले साल केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता का मुद्दा उठाया था। उन्होंने अक्टूबर 2018 में दिए एक भाषण के दौरान कहा था कि जो सरकार केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से समझौता करती है उसे बाजार की नाराजगी झेलनी पड़ती है। इस बयान के बाद सरकार और पटेल के बीच चल रहा विवाद सामने आ गया था। आचार्य ने भी बैंकों की स्वायत्तता की बात कही थी। पटेल के इस्तीफा देने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि आचार्य भी पद छोड़ सकते हैं। आखिरकार 6 महीने शेष रहते आचार्य ने अपने पद से त्यागपत्र देकर सूत्रों के कयास की सच्चाई पर मुहर लगा दी। मालूम हो कि उस वक्त आरबीआई ने उन खबरों का खंडन किया था।
शिक्षा क्षेत्र से वापस जुड़ेंगे आचार्य

अपने इस्तीफे को लेकर आचार्य का कहना है कि उन्होंने निजी कारणों से यह फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट पर भरोसा करें तो आचार्य शैक्ष‌िणक क्षेत्र का रुख करने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में वे न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में वे शिक्षक के तौर पर अपनी दूसरी पारी की शुरूआत करेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे एकैडमिक पृष्ठभूमि से आते हैं। आबीआई से जुड़ने से पहले वे न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में अर्थशास्‍त्र के प्रोफेसर रह चुके थे। उससे पहले लंदन बिजनेस स्कूल (एलबीएस) में भी उन्होंने 7 सालों तक अपनी सेवा दी थी। बैंक्स एंड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस विषय से पीएचडी करने वाले आचार्य का परिवार भी अमेरिका में ही रहता है।

गौरतलब है कि आचार्य के इस्तीफे के बाद रिजर्व बैंक में एस विश्वनाथन, बी पी कानूनगो और एम के जैन यही तीन डिप्टी गवर्नर एन बचे हैं। जुलाई के पहले हफ्ते में विश्वनाथन का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। सूत्रों की मानें तो आचार्य के अचानक इस्तीफा देने के बाद विश्वनाथ का कार्यकाल और 2 साल बढ़ाया जा सकता है।

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