आयुष मंत्रालय ने बीएचयू की दवा को कोरोना के ट्रायल के लिए दी मंजूरी, 10 लाख रुपये की भी स्वीकृति

नयी दिल्ली : देशभर में महामारी का रूप धारण कर चुके कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए देशभर में दवा व वैक्सीन बनाने के लिए अलग-अलग रिसर्च व ट्रायल किये जा रहे है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार  इसी के तहत आयुष मंत्रालय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय / बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी(बीएचयू) के आयुर्वेद संकाय द्वारा 40 साल पहले खोज कर बनायी गयी आयुर्वेदिक दवा ‘शिरीषादि कसाय’ को कोरोना दवा के ट्रायल के लिए मंजूरी दे दी है। आयुष मंत्रालय ने इस काम के लिए 10 लाख रुपये की राशि भी स्वीकृत की है।
तीन महीने बाद आयुष मंत्रालय को सौंपी जायेगी रिपोर्ट
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीन महीने तक इस दवा का ट्रायल पूरा होने के बाद बीएचयू आयुर्वेद विभाग अपनी रिपोर्ट आयुष मंत्रालय को सौपेंगा। बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी के आयुर्वेद विभाग द्वारा वर्ष 1980 में शिरीषादि कसाय सांस रोग के लिए खोजी गई थी। आयुर्वेदिक दवा शिरीषादि कसाय शिरीष संग वासा, मुलेठी, तेजपत्ता, कंडकारी औषधीय से मिलकर बना हैं।
यहां होगा ट्रायल
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कोविड अस्पताल में भर्ती युवा मरीजों पर कोरोना के आयुर्वेदिक दवा का ट्रायल किया जाएगा।
22 मार्च को भेजा गया था आवेदन पत्र
आयुर्वेद संकाय के डीन डॉ यामिनी भूषण त्रिपाठी के अनुसार 22 मार्च को आयुर्वेद संकाय द्वारा पत्र लिखकर आयुष मंत्रालय से 1980 में सांस रोग के लिए खोजी गई दवा ‘शिरीषादि कसाय’ के ट्रायल की मंजूरी मांगी गयी थी। अब आयुष मंत्रालय ने इसके ट्रायल की अनुमति दे दी है, जल्द ही इस आयुर्वेदिक दवा का ट्रायल शुरू किया जाएगा।
10 लाख रुपये राशि की मंजूरी
आयुष मंत्रालय ने इस काम के लिए 10 लाख रुपये की राशि भी स्वीकृत की है। यामिनी भूषण त्रिपाठी ने बताया कि आयुर्वेद विभाग और बीएचयू कोविड अस्पताल के संयुक्त उद्यम में इसका ट्रायल किया जाएगा। कोरोना में बिलकुल वैसे ही लक्षण है जैसे आम तौर पर सांस रोग के मरीजो में होते हैं। ये दवा उनके लिए उपयोगी होने की उम्मीद है।

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