राजनीति स्वार्थों के लिए देश पर थोपा गया था आपातकाल: नड्डा

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नयी दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने देश में आपातकाल की 45वीं बरसी पर गुरुवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे इतिहास का काला अध्याय बताया और कहा कि यह अधिनायकवादी मानसिकता ने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए देश पर थोपा। श्री नड्डा ने ट्विटर पर‘आपातकाल का काला अध्याय’शीर्षक से साझा पोस्ट में लिखा ‘वर्ष 1975 में आज ही के दिन निहित राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा आपातकाल की घोषणा कर सरकार के खिलाफ बोलने वालों को जेल में डाल दिया गया था, देशवासियों के मूलभूत अधिकार छीनकर अखबारों के दफ्तरों पर ताले लगा दिए गए थे।‘’उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस द्वारा थोपे गए शर्मनाक आपातकाल की बरसी पर मैं उन सभी राष्ट्रभक्तों को नमन करता हूं जिन्होंने घोर अन्याय व यातनाएं सहने के बावजूद लोकतंत्र की हत्या करने वालों के सामने घुटने नहीं टेके।’’ तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगाया था। आपातकाल 21 मार्च 1977 तक लागू रहा था। श्री नड्डा ने एक ट््वीट में लिखा, ‘‘भारत उन सभी महानुभावों को नमन करता है, जिन्होंने भीषण यातनाएं सहने के बाद भी आपातकाल का जमकर विरोध किया। ये हमारे सत्याग्रहियों का तप ही था जिससे भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों ने एक अधिनायकवादी मानसिकता पर सफलतापूर्वक जीत प्राप्त की।’’

आपातकाल ‘अधिनायकवादी’ मानसिकता का परिचायक

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने देश पर थोपे गए आपातकाल के 45 साल पूरे होने पर गुरुवार को कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और इसे उसकी ‘अधिनायकवादी’ मानसिकता का परिचायक करार दिया। नड्डा ने एक ट्वीट में कहा, ‘भारत उन सभी महानुभावों को नमन करता है, जिन्होंने भीषण यातनाएं सहने के बाद भी आपातकाल का जमकर विरोध किया। ये हमारे सत्याग्रहियों का तप ही था जिससे भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों ने एक अधनियाकवादी मानसिकता पर सफलतापूर्वक जीत प्राप्त की।’
21 महीने की अवधि तक आपातकाल लागू रहा
देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच 21 महीने की अवधि तक आपातकाल लागू रहा। इंदिरा गांधी उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं। इसके साथ ही नड्डा ने टिवटर पर ‘आपातकाल का काला अध्याय’ शीर्षक से एक पोस्ट भी साझा की। इसमें उन्होंने कहा ‘वर्ष 1975 में आज ही के दिन निहित राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा आपातकाल की घोषणा कर सरकार के खिलाफ बोलने वालों को जेल में डाल दिया गया था, देशवासियों के मूलभूत अधिकार छीनकर अखबारों के दफ्तरों पर ताले लगा दिए गए थे।’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस द्वारा थोपे गए शर्मनाक आपातकाल की बरसी पर मैं उन सभी राष्ट्रभक्तों को नमन करता हूं जिन्होंने घोर अन्याय व यातनाएं सहने के बावजूद लोकतंत्र की हत्या करने वालों के सामने घुटने नहीं टेके।’

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