असम में 40 लाख लाेगाें की नागरिकता खत्म हाेने से पहले अजीत डाेभाल असम क्यों गए?

अजीत डोभाल

नयी दिल्ली (विशेष संवाददाता ) : असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से 40 लाख लाेग, जो भारतीय नागरिकता से बाहर हाे गए हैं, वह महज एक इत्तफाक है या फिर किसी साेची समझी रणनीति का हिस्सा? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्याेंकि सिटीजन रजिस्टर के फाइनल ड्राफ्ट जारी हाेने से 48 घंटे पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डाेभाल असम गए थे। आखिर डाेभाल असम क्या करने गए थे?
गृह मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्राें की यदि माने ताे रजिस्टर में नाम रखना व छाेड़ना एक सुनियाेजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है आैर इस सबके पीछे है वाेट बैंक की राजनीति। उधर असम सरकार द्वारा सोमवार को जारी नेशनल सिटीजन रजिस्टर के फाइनल ड्राफ्ट पर सियासी घमासान आैर आराेप प्रत्याराेप का सिलसिला शुरू हो गया है। रजिस्टर से 40 लाख लाेगाें की नागरिकता यूं ही खत्म नहीं हाे गयी है। यह एक सुनियाेजित याेजना का परिणाम है। गृह मंत्रालय के अंदरूनी सूत्राें ने बताया कि फाइनल ड्राफ्ट जारी हाेने से दाे दिन पहले डाेभाल असम में थे। वहां उन्हाेंने नार्थ ईस्ट की राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाले हेमंत बिश्वशर्मा से मुलाकात की थी। बताया जाता है कि मुलाकात के दाैरान अन्य बाताें के अलावा दाेनाें के बीच राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर काे लेकर गंभीर विचार विमर्श हुआ था। बिश्वशर्मा ने डाेभाल काे असम के वाेटराें का गणित समझाया आैर उन पॉकेटाें काे हटा देने की सलाह दी, जिसमें भाजपा के कट्टर वाेटराें की संख्या अपेक्षाकृत कम थी। एेसा करने के पीछे मकसद सन् 2019 के चुनाव काे लेकर वाेटराें पर दवाब बनाना बताया जाता है। बहरहाल इस रजिस्टर को लेकर लाेगाें के मन में सवाल उठ रहे हैं कि जो लोग भारत के वैध नागरिक नहीं हैं, उनका भविष्य क्या होगा? 40 लाख लोगों का क्या होगा? अंतिम ड्राफ्ट आने के बाद जिनका नाम एनआरसी में नहीं आता है उनका भविष्य क्या होगा? क्या उन्हें बांग्लादेश भेज दिया जाएगा? फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लिस्ट जारी की जा रही है, लेकिन उसके बाद क्या करना है, इसकाे लेकर नीति साफ नहीं है। सवाल यह भी है कि जिन 40 लाख लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं है, वे क्या अगले आम चुनाव में वोट डाल पाएंगे? क्या आगामी आम चुनाव तक इस समस्या का समाधान निकल आएगा? इतनी बड़ी संख्या में अवैध नागरिकों के साथ क्या सलूक हो, इसे लेकर केंद्र और राज्य सरकार के पास काेई ब्लू प्रिंट नहीं है।

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