अयोध्या में प्रधानमंत्री मोदी करेंगे राम मंदिर के लिए भूमि पूजन, 5 अगस्त की तारीख तय

अयोध्या : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण काम अगस्त के पहले हफ्ते से शुरू कर दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर के भूमि पूजन की तारीख 5 अगस्त को तय की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां राम मंदिर का भूमि पूजन कर सकते हैं। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि 5 अगस्त प्रधानमंत्री मोदी के अयोध्या जाने की संभावना है, लेकिन अभी इसकी आधिकारिक घोषणा होनी बाकी है। कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम में सीमित लोग ही शामिल हो पाएंगे। प्रधानमंत्री के अलावा भूमि पूजन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगा आदित्यनाथ भी शिरकत करेंगे। मालूम हो कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की शनिवार को हुई बैठक में प्रधानमंत्री को अगस्त के पहले हफ्ते की 2 तारीखें दी गई थी। अब 5 अगस्त को पूर्णिमा के दिन भूमि पूजन किया जाएगा। इस दिन हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्र पक्ष द्वितीय का दिन है।
बढ़ेगा मंदिर परिसर का दायरा
पहले के मानचित्र के अनुसार, नागर शैली के इस मंदिर परिसर क्षेत्र का दायरा करीब 67 एकड़ में रखा गया था, जिसे नए डिजाइन और ऊंचाई की जरूरत के हिसाब से 100-120 एकड़ में विस्तारित किया जा सकता है। मंदिर की रूपरेखा तैयार होने के 15 दिन के अंदर ही नई डिजाइन के अनुसार महायोजना तैयार हो सकता है। बता दें कि राम मंदिर परिसर का दायरा करीब 100 से 120 एकड़ तक का होगा।
मंदिर निर्माण में लगेंगे 100 करोड़ रुपए
मंदिर के मौजूदा डिजाइन के हिसाब से करीब 100 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यदि डिजाइन में बदलाव किया जाता है तो खर्च बढ़ने की संभावना है। लागत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि मंदिर को किस समयसीमा में पूरा किया जाना है। निर्माण को समय सीमा में पूरा करने के लिए ज्यादा संसाधन और बजट की आवश्यकता होगी। मंदिर के निर्माण में 100 करोड़ रुपए से अधिक खर्च तथा बनने में करीब साढ़े तीन वर्ष का समय लगेगा।
गर्भगृह में नहीं होगा कोई बदलाव
अयोध्या में सोमपुरा ने शनिवार को मंदिर निर्माण के संबंध में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भगृह, आरती स्थल, सीता रसोई, रंगमंडपम की संरचना में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसकी संरचना पुराने नक्शे के अनुसार ही रहेगी। सोमपुरा ने कहा कि नए राम मंदिर की ऊंचाई बढ़ाई गई है, लेकिन यह भारत में सबसे ऊंचे शिखर वाला मंदिर नहीं होगा। दक्षिण भारत में कई मंदिरों के शिखर की ऊंचाई 200 से 250 फिट से ज्यादा है। जबकि अक्षरधाम समेत कई मंदिरों में पांच गुंबद हैं। द्वारका मंदिर तो सात मंजिला है।

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