अंतरिक्ष में भारत से 32 गुना ज्यादा कचरा अमेरिका ने फैलाया तो चीन ने 20 गुना

नयी दिल्ली : चाहे वह विज्ञान का क्षेत्र हो या अाईटी का या गणित ही क्‍यों न हो आज पूरी दूनिया भारतीयों के प्रतिभा की कायल है। आज भारत वंशी हर क्षेत्र में अपना डंका बजा रहे हैं। अभी हाल ही में भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में परीक्षण करते हुए एक सेटेलाइट को मिसाईल से मार गिराया जिसके बाद अमेरिका सहित उसके मित्र देशों हाय तौबा मचाना शुरु कर दिया कि इस प्रकार के परीक्षण से अंतरिक्ष में कचरा फैल जायेगा। 4 अक्टूबर 1957 को रूस ने पहली बार अंतरिक्ष में मानव निर्मित सैटेलाइट स्पूतनिक भेजा था। विज्ञान द्वारा अंतरिक्ष में छलांग लगाने के 62 सालों बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (द नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) ने चिंता जताई है कि अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे की वजह से भविष्य में मानव मिशन भेजना मुश्किल हो जाएगा। नासा ने भारत के एंटी-सैटेलाइट (ए-सैट) मिसाइल के परीक्षण से निकले मलबे से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, आईएसएस (इंटरनेशनल स्पेस सेंटर) को पैदा हुए खतरे को खतरनाक बताया है। नासा प्रमुख ने कहा कि परीक्षण में नष्ट हुए भारतीय उपग्रह के 400 से भी अधिक टुकड़े अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे हैं। इससे आईएसएस को और उसमें रह रहे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए संभावित खतरा पैदा हो गया। नासा प्रमुख का कहना है कि भविष्य के अंतरिक्ष मिशन के लिए इस तरह की गतिविधियां सही साबित नहीं होंगी। हालांकि नासा के खुद के आंकड़ों के मुताबिक अंतरिक्ष में बाकी देशों के मुकाबले अमेरिका ने सबसे ज्यादा कचरा पैदा किया है। वहीं भारत ने कहा है कि ए-सैट के परीक्षण से जो टुकड़े अंतरिक्ष में मौजूद हैं, वे कुछ समय बाद गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी की ओर गिरेंगे, और हवा के घर्षण के कारण जलकर नष्ट हो जाएंगे। भारतीय वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि ये परीक्षण अंतरिक्ष में पैदा होने वाले कचरे को ध्यान में रखते हुए किया गया था। जबकि इससे पहले चीन द्वारा ऐसे ही दो परीक्षण किए गए थे, जिनका मलबा अभी भी अंतरिक्ष में मौजूद है। अंतरिक्ष में सैटेलाइट आदि के लॉन्च से भी कचरा पैदा होता है, जिसमें अमेरिका और चीन सबसे आगे हैं। नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती पर इस वक्त 8400 टन से ज्यादा अनावश्यक हार्डवेयर मौजूद है, जो कि कचरे के तौर पर इधर से उधर घूम रहे है। वैज्ञानिकों के अनुसार धरती पर कचरे के बाद अगली सबसे बड़ी समस्या अंतरिक्ष पर कचरे की है और यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह उपग्रह अंतरिक्ष के कचरे का पता लगाएगा। इनमें पुराने रॉकेट और अंतरिक्ष में टूटकर बिखर चुके अंतरिक्ष यान शामिल होंगे। नासा की विशिष्ट एजेंसियां सभी महत्वपूर्ण बड़े टुकड़ों को ट्रैक करती हैं, और आईएसएस व दूसरी सैटेलाइट से टकराने के खतरे की भविष्यवाणी करती है। नासा ने 10 सेंटीमीटर से ज्यादा बड़े 23,000 टुकड़ों को ट्रैक किया है, जिसमें से 10,000 टुकड़ों को अंतरिक्ष कचरा बताया गया है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी भी यह काम करती है। अंतरिक्ष के कचरे से निपटने के लिए ब्रिटेन एक डेमो मिशन की शुरुआत कर चुका है। इस मिशन में एक छोटा उपग्रह अंतरिक्ष के मलबे को कैप्चर और ट्रैक करने का काम कर रहा है। इस उपग्रह को अंतरिक्ष के कचरे को हटाने के लिए आईएसएस पर तैनात किया गया है। यह डेमो मिशन उस तकनीक का प्रदर्शन करेगा जिसकी मदद से अंतरिक्ष के कचरे को कम किया जा सकता है।

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