उद्धव ठाकरे ने ली महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ

मुंबई : महाराष्ट्र में गुरुवार शाम को शिवाजी पार्क में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई। गौरतलब है कि पहली बार ठाकरे परिवार का कोई सदस्य महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बना है। उद्धव राज्य में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ‘महाराष्ट्र विकास अघाड़ी’ की सरकार का नेतृत्व करने जा रहे हैं। उद्धव ठाकरे के शपथ ग्रहण समारोह में महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के सुप्रीमो राज ठाकरे भी पहुंचे।

सोनिया और राहुल नहीं हुए समारोह में शामिल

इस शपथ समारोह में करीब 70 हजार समर्थकों के अलावा कई दिग्गज नेताओं ने हिस्सा लिया। मौके पर द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मनसे प्रमुख राज ठाकरे भी मौजूद रहे। साथ ही मुकेश अंबानी अपनी पत्नी नीता अंबानी अपने पुत्र अनंत अंबानी के साथ इस समारोह में शामिल हुए। वहीं सोनिया गांधी और राहुल गांधी इस मौके पर उपस्थित नहीं हुए। दोनों ने उद्धव को मुख्यमंत्री पद की बधाई देते हुए समारोह में शामिल न हो पाने पर खेद जताया।

शपथ ग्रहण के तुरंत बाद करेंगे कैबिनेट की बैठक

उद्धव शपथ ग्रहण के तुरंत बाद कैबिनेट की पहली बैठक करेंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि अपनी पहली बैठक में उद्धव किसानों की कर्जमाफी से जुड़ा फैसला ले सकते हैं। साथ ही फसलों की बीमा योजना के रिव्यू पर का फैसला लिया जा सकता है। गठबंधन की प्रेसवार्ता में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने कहा- सरकार संकट से जूझ रहे किसानों के पक्ष में ‌निर्णय लेगी। कैबिनेट की बैठक में नाहर रिफाइनरी और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर चर्चा की जाएगी।

विधायक नहीं रहने पर भी बने मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही ऐसे आठवें मुख्यमंत्री बन गए हैं जो विधायक नहीं रहते हुए भी राज्य के मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस नेता ए आर अंतुले, वसंतदादा पाटिल, शिवाजीराव निलांगेकर पाटिल, शंकरराव चव्हाण, सुशील कुमार शिंदे और पृथ्वीराज चव्हाण उन नेताओं में शामिल हैं जो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते वक्त राज्य विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं थे। तत्कालीन कांग्रेस नेता एवं मौजूदा राकांपा प्रमुख शरद पवार का नाम भी इन्हीं नेताओं में शुमार है। संविधान के प्रावधानों के अनुसार कोई नेता यदि विधानसभा या विधान परिषद् का सदस्य नहीं है तो उसे पद की शपथ लेने के छह महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना होता है।

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