अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 40 दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा

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नई दिल्ली : शीर्ष अदालत ने अयोध्या मामले पर 40 दिन की सुनवाई के बाद बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद से जुड़े सभी पक्षों को 3 दिन के भीतर मोल्डिंग ऑफ रिलीफ (राहत में बदलाव) पर लिखित दलील दाखिल करने के लिये कहा है, यानी मालिकाना हक किसी एक या दो पक्ष को मिल जाए तो बचे हुए पक्षों को क्या वैकल्पिक राहत मिल सकती है। हिंदू महासभा के वकील वरुण सिन्हा ने बताया कि संविधान पीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि फैसला 23 दिन के भीतर आएगा। संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होंगे।

मुस्लिम पक्ष के वकील ने नक्शा फाड़ा

इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत काफी गहमागहमी का वातावरण रहा। इसी दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हिंदू महासभा के वकील द्वारा अदालत में पेश किए गए नक्शे को फाड़ दिया। इस प्रकार के व्यावहार को देखते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ऐसा होता रहा तो हम उठकर चले जाएंगे। वहीं महासभा के वकील विकास सिंह ने कहा कि इस नक्शे में विवादित जमीन पर रामलला के वास्तविक जन्मस्थान को दर्शाया गया है। जिस पर राजीव धवन ने ऐतराज जताया। इस मामले में बुधवार की सुबह सुनवाई शुरू होने पर पीठ ने स्पष्ट कर दिया था कि वह पिछले 39 दिनों से अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुनवाई कर रही है। पीठ ने कहा था कि इस मामले में सुनवाई पूरी करने के लिए किसी भी पक्षकार को आज (बुधवार) के बाद अब और समय नहीं दिया जाएगा। वहीं अदालत द्वारा नियुक्त किए गए मध्यस्थता पैनल ने बुधवार को समझौता रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा गया कि मुस्लिम और हिंदू पक्ष विवादित भूमि पर समझौते के लिए तैयार हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित जमीन के बदले किसी और स्थान पर वैकल्पिक जमीन देने की शर्त पर सहमत हुआ है।

बुधवार को कोर्ट रूम में क्या हुआ

हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने विवादित जगह और मंदिर की मौजूदगी साबित करने के लिए पूर्व आईपीएस अफसर किशोर कुणाल की किताब ‘अयोध्या रिविजिटेड’ का हवाला देना चाहा। धवन ने इसे रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बताते हुए विरोध किया।विकास सिंह ने एक नक्शा पेश किया और उसकी कॉपी धवन को भी दी। धवन ने विरोध करते हुए नक्शे की कॉपी फाड़ना शुरू कर दी।धवन के तरीके पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा- आप चाहें तो पूरे पेज फाड़ सकते हैं।चीफ जस्टिस ने यह भी कहा- अगर इसी तरह चलता रहा, तो सुनवाई अभी पूरी कर दी जाएगी। फिर जिस भी पक्ष को दलील देनी होगी, वह लिखित में ले ली जाएगी।

एक बार जो मंदिर था, वह मंदिर ही रहेगा

बता दें कि 5 जजों की बेंच में चीफ जस्टिस गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर हैं। बेंच ने मंगलवार को हिंदू पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील के पाराशरण से कई कानूनी मुद्दों कानून की सीमाएं जैसे सवाल पूछे। बेंच ने कहा, ‘‘उनका (मुस्लिम पक्ष) का कहना है कि एक बार मस्जिद हो गई, तो वह हमेशा मस्जिद ही रहेगी। क्या आप इससे सहमत हैं?’’ इस पर पाराशरण ने कहा, ‘‘मैं इसका समर्थन नहीं करता। मैं कहूंगा- एक बार कोई मंदिर बन गया, तो वह हमेशा मंदिर ही जाना जाएगा।’’

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