इसरो ने रचा इतिहास : चंद्रयान-2 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

chandrayaan-2 launch

श्रीहरिकोटा : भारत का सपना आज साकार हो गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 सोमवार को दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार लॉचिंग के बाद रॉकेट की इसे ले जा रहे रॉकेट की गति नियंत्रित है साथ ही स्थिति भी सामान्य है। इसरो  के अनुसार प्रक्षेपण सफल रहा है। वैज्ञानिकों ने एक दूसरे को बधाई दी। मालूम हो कि इसरो ने शनिवार को इस मिशन की तैयारी पूरी कर ली थी। इसरो निदेशक के शिवन ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है।

अपराह्न 2.43 मिनट पर होगी लॉन्चिंग

इसरो के पूर्व प्रमुख एएस किरण कुमार ने कहा था कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आज यानि सोमवार को चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग अपराह्न 2.43 मिनट पर होगी। ज्ञात हो कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग 15 जुलाई को होनी थी, लेकिन लॉन्चिंग से चंद घंटे पहले तकनीकी खराबी की वजह से मिशन को रोक दिया गया था। इसरो के एसोसिएट डायरेक्टर (पब्लिक रिलेशन) बीआर गुरुप्रसाद ने बताया था कि प्रक्षेपण से ठीक पहले लॉन्चिंग व्हीकल सिस्टम में खराबी आ गई थी, जिस वजह से मिशन को आगे के लिए टाल दिया गया है।

समय पर पहुंचेगा चंद्रयान-2

गौरतलब है कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग आज से 7 दिन पहले होने वाली थी। इस मिशन पर ब्रेक लगने के बावजूद चंद्रयान-2 चांद की सतह पर अपने तय समय 7 ‌‌सितंबर को पहुंचेगा। इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मिशन को तय समय पर पहुंचाने का मकसद है कि चंद्रयान-2 के तीन हिस्से ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर अपने कार्यक्रम के अनुसार काम कर सकें। साथ ही उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 पृथ्वी को पांच चक्कर लगाने थे, लेकिन समय सीमा को देखते हुए वह अब यह चार चक्कर लगाएगा। इसके अलावा उन्होंने बताया कि इसकी लैंडिंग सूर्य की सबसे ज्यादा रोशनी वाली जगह पर तय की गई है। बता दें कि लैंडर और रोवर यहां 15 दिनों तक काम करेगा।

चंद्रयान-2 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा

इसरो चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने के लिए अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट जियो सैटेलाइट लांच व्हीकल- मार्क 3 (जीएसएलवी-एमके 3) का इस्तेमाल करेगा। इस रॉकेट में चंद्रयान-2 के तीन हिस्से ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) होंगे। यह रॉकेट 3.8 टन वजन वाले चंद्रयान-2 को लेकर उड़ान भरेगा। अलग-अलग चरणों में सफर पूरा करते हुए यान 7 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। मालूम हो कि अब तक विश्व के केवल तीन देशों अमेरिका, रूस व चीन ने चांद पर अपना यान उतारा है, लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर यान उतारने वाला भारत दुनिया का पहला देश होगा। चंद्रयान-2 का वजन चंद्रयान-1 के मुकाबले से तीन गुना ज्यादा है।

लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर चांद पर करेंगे शोध

इसरो ने बताया कि ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर का मुख्य उद्देश्य चांद पर शोध करना है। जिसमें ऑर्बिटर का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच संचार स्‍थापित करना है। वह यहां के सतह के बारे में जानकारी देगा। आर्बिटर यहां एक साल तक काम करेगा। लैंडर का काम चांद की सतह पर होने वाली प्राकृतिक घटनाओं (आपदा) की खोज करना है और रोवर का मुख्य लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर खनिज तत्वों का पता लगाना है।

बता दें कि इसरो चंद्रयान-2 अक्टूबर 2018 में लॉन्च करने वाला था। कुछ कारणों से चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की तारीख बदलती गई। इस मिशन की लॉन्चिंग तारीख अक्टूबर के बाद 3 जनवरी उसके बाद 31 जनवरी की गई। उसके बावजूद मिशन को आगे टाल दिया गया। अब जाकर आज प्रक्षेपण सफल होने की संभावना है।

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