नागरिकता संशोधन विधेयक पर असम में कड़ा विरोध, सड़क पर उतरे लोग

नई दिल्ली : नागरिकता संशोधन विधेयक को लोकसभा में मंजूरी मिलने के बाद असम में लोगों ने विरोध प्रर्दशन तेज कर दिया है। सोमवार को लोकसभा में इस मुद्दे पर करीब 7 घंटे तक बहस हुई। इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इस विधेयक के कारण पूर्वोत्तर में रहने वालों के लिए किसी तरह की परेशानी उत्पन्न नहीं होगी। बावजूद इसके असम में इस विधेयक का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। यहां डिब्रूगढ़ में लोग सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे हैं। साथ ही ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (एएएसयू) ने डिब्रूगढ़ में नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ धरना दिया। इतना ही नहीं इस विधेयक के पास होने के विरोध में नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन (एनईएसओ) और एएएसयू ने 12 घंटे का बंद भी बुलाया है।

इस विधेयक से राज्य की पहचान खत्म हो जाएगी

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस विधेयक के जरिए राज्य की पहचान खत्म हो जाएगी और सामाजिक ताने बाने पर भी असर पड़ेगा। वहीं संसद परिसर में एआईयूडीएफ के सांसद बदरुद्दीन अजमल ने बैनर के साथ विरोध किया था जिस पर लिखा था कि असम इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक सोमवार देर रात 12 बजे लोकसभा में पारित हो गया। घंटों चली बहस के बाद हुए मतदान में विधेयक के पक्ष में 311 जबकि विरोध में 80 वोट पड़े। अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

किसी को इससे डरने की आवश्यकता नहीं : केंद्र

केंद्र सरकार ने विधेयक को पेश करने के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था कि किसी को इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि देश ने देखा कि किस तरह से पार्टी ने इस असंवैधानिक विधेयक का विरोध किया। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि इस बिल से सामाजिक समरसता प्रभावित होगी।

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