महाराष्ट्र में महानाटक, अब एनसीपी को सरकार बनाने का न्यौता

मुंबई : महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए सियासत का महानाटक चल रहा है। राज्य में 105 विधायकों वाली भारतीय जनता पार्टी द्वारा सरकार बनाने में असमर्थता जताने के बाद राज्यपाल ने रविवार को दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना को सरकार बनाने का न्यौता दिया था। शिवसेना के 56 विधायक हैं। शिवसेना को दिनभर उम्मीद थी कि शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रीय कांग्रेसवादी पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस उसे समर्थन दे देगी, जिससे वह पूर्ण बहुमत की सरकार बना पाएगी। एनसीपी के 54 ​और कांग्रेस के 44 विधायक हैं। तीनो मिलाकर 154 विधायक हो जाते, जो बहुमत से 9 विधायक ज्यादा होते। इसी बीच, मोदी सरकार में शिवसेना के इकलौते मंत्री अरविंद सावंत ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया।

दिनभर एनसीपी और कांग्रेस की बैठकों का दौर चला। एनसीपी ने मौखिक रूप से शिवसेना को समर्थन देने की बात कही थी, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में ढाई घंटे की बैठक के बावजूद कांग्रेस यह निर्णय नहीं ले पाई कि शिवसेना को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया जाए या नहीं। इसमें सबसे बड़ी अड़चन है महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं का दो-फाड़ होना। एक पक्ष शिवसेना के साथ सरकार बनाना चाहता है, जबकि दूसरा इसके विरोध में है।

राज्यपाल ने शिवसेना को नहीं दिया और समय 

इस बीच सरकार बनाने के निमंत्रण में दिया गया 24 घंटे का समय पूरा होने से पहले महाराष्ट्र में सरकार बनाने के इच्छुक शिवसेना नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने के लिए 48 घंटे का समय और मांगा, लेकिन राज्यपाल ने और समय देने से इनकार कर दिया। मुलाकात के बाद शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार बनाने की इच्छुक है, लेकिन राज्यपाल ने और समय देने से इनकार कर दिया है।

राज्यपाल ने एनसीपी को बुलाया

इस बीच, शिवसेना द्वारा आवश्यक समर्थन न जुटा पाने पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने रात 8:30 बजे ​एनसीपी को फोन कर सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। राजभवन से जारी बयान में कहा गया कि शिवसेना सरकार बनाने के लिए जरूरी विधायकों का समर्थन पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाई, इस कारण एनसीपी को महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है। देर रात एनसीपी नेता अजित पवार के साथ छगन भुजबल व धनंजय मुंडे ने राज्यपाल से मुलाकात की। उन्हें मंगलवार रात 8:30 बजे तक सरकार बनाने के लिए समर्थन पत्र सौंपने का समय दिया गया है।

सोनिया व एनसीपी ने बुलाई आपात बैठक

इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार सुबह 10 बजे पार्टी की आपात बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में तय हो जाएगा कि कांग्रेस शिवसेना व एनसीपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाएगी या नहीं। वहीं दूसरी ओर एनसीपी ने मंगलवार सुबह 11 बजे अपनी बैठक बुलाई है। गौर करने वाली बात है कि सोनिया गांधी ने कांग्रेस की बैठक एनसीपी की बैठक से पहले बुलाई है।

सावंत ने दिया पीडीपी और जेडीयू का उदाहरण

मोदी सरकार में शिवसेना के एकमात्र मंत्री अरविंद सावंत ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और कहा कि ‘ बीजेपी ने चुनाव के पहले जो वादे किए थे, उससे मुकर गई है। ऐसे में केंद्र सरकार में मंत्री बने रहने का मेरा नैतिक अधिकार नहीं है। इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया।’ उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में नई सरकार बनने जा रही है। विरोधी विचारधारा के सवाल पर सावंत ने कहा कि जब कश्मीर में महबूबा मुफ्ती और बिहार में नीतीश कुमार के साथ सरकार बनाई गई तो वहां कौन सी विचारधारा थी।

30 साल की दोस्ती टूटी

गौरतलब है कि भाजपा-शिवसेना 30 साल में दूसरी बार अलग हो रहे हैं। दोनों दलों के बीच 1989 में गठबंधन हुआ था। 1990 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव दोनों दलों ने साथ लड़ा था। 2014 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल अलग हो गए थे। दोनों दलों ने चुनाव भी अलग लड़ा। हालांकि, बाद में सरकार में दोनों साथ रहे।

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