श्रीनगर में तिरंगा फहराना चाहते हैं शाह, अधिकारियों को हालात बिगड़ने की आशंका

श्रीनगर : गृह‌मंत्री अमित शाह 15 अगस्त को श्रीनगर के लाल चौक पर में तिरंगा फहराने जाना चाहते हैं लेकिन अधिकारियों को आशंका है कि उनके दौरे से घाटी में शांति व्यवस्‍था प्रभाावित हो सकती है। मालूम हो कि ईद उल अजहा (बकरीद) के मौके पर प्रदेश में कर्फ्यू में ढील दी गई थी ताकि लोग खरीदारी कर सकें। साथ ही मस्जिदों में नमाज पढ़ने की भी इजाजत दी गई थी। गृह मंत्रालय की मानें तो बारामूला जामा मस्जिद में करीब 10 हजार लोगों ने नमाज अता की। वहीं कुछ इलाकों से प्रदर्शन और पत्‍थरबाजी की खबरें भी सामने आई हैं। शाह के दौरे को लेकर अधिकारियों का कहना है कि कश्मीर में मौजूदा हालात को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का आयोजन सुरक्षाबलों के लिए चुनौती भरा होगा। सूत्रों के अनुसार शाह श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना चाहते हैं। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ हुई बैठक में स्‍थानीय अधिकारियों ने सलाह दी है कि वे ऐसा न करें तो बेहतर होगा।

इस वजह से लाल चौक पर फहराना चाहते हैं तिरंगा

सूत्रों के मुताबिक देश की आजादी के जश्न के अवसर पर जम्मू-कश्मीर में सभी पंचायतों में भी तिरंगे का झंडोत्तोलन किया जाएगा। शाह के इस संभावित दौरे को राजनीतिक हलकों में बड़ा फैसला माना जा रहा है। लेकिन इस बारे में सरकार की ओर से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है। मालूम हो कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि राज्य में अनुच्छेद 370 से अगर किसी ने छेड़खानी की कोशिश की तो कश्मीर में तिरंगा फहराने वाला कोई नहीं बचेगा। शाह के संभावित कश्मीर दौरे को लेकर कयास लगाया जा रहा है कि महबूबा के उस बयान को उन्होंने चुनौती के रूप में लिया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि स्वतंत्रता दिवस पर शाह दिल्ली से श्रीनगर के कार्यक्रम में शामिल होने को जायेंगे।

सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक करेंगे
गृहमंत्री के जम्मू कश्मीर दौरे को लेकर कयास लगाया जा रहा है कि जब वे स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा लेने वहां जायेंगे तो वे वहां की सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक करेंगे। साथ ही वे राज्य में कानून व्यवस्था के हालातों की समीक्षा भी करेंगे। हालांकि इस विषय में भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की मोदी सरकार की और से ऐसी कोई भी जानकारी आधिकारिक तौर पर नहीं दी गई है। सूत्रों की जानकारी को भी इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि अनुच्छेद 370 खत्म करने को लेकर भी पहले से किसी तरह की जानकारी सरकार की ओर से सामने नहीं लाई गई थी। सबकुछ अचानक ही हुआ है।

शाह लाल चौक पर फहरा सकते हैं तिरंगा 
अमित शाह के श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। तिरंगा लहराने के लिए लाल चौक को चुने जाने की चर्चा की मुख्य वजह यह है कि यह स्थान संवेदनशील माना जाता है। ज्यादातर घटना लाल चौक को ही केंद्र में रखकर होती रही है। यहां झंडा फहराने को लेकर पहले भी काफी विवाद हो चुके हैं। फिलहाल कश्मीर में हालात तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। हालांकि किसी भी तरह के घटना से निपटने के लिए वहां सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। मालूम हो कि अमरनाथ यात्रा मार्ग में पाकिस्तानी बारूदी सुरंग और स्नाइपर राइफल मिलने के बाद घाटी से पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को लौटने की सलाह दी गई थी।
भारी सुरक्षाबल तैनात
संसद में अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त करने से पहले ही केंद्र सरकार ने वहां किसी भी हालात का सामना करने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की है। सोमवार को घाटी में चप्पे-चप्पे पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। साथ ही सुरक्षा को और पुख्ता करने और शांति के साथ कानून व्यवस्‍था को बनाए रखने के लिए सोमवार को वहां 8 हजार अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों को सी-17 विमान से भेजा गया है। वहीं राज्य में कानून व्यवस्‍था पर नजदीक से नजर रखने के लिए राष्ट्री सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस समय कश्मीर घाटी के दौरे पर हैं। यहां वह लोगों से बातचीत करेंगे साथ ही राज्य में हो रही हर छोटी बड़ी घटना की रिपोर्ट को वे केंद्र सरकार को सौंपेंगे। मालूम हो कि 8 हजार अद्धसैनिक बलों को भेजने से पहले वहां सरकार ने 100 कंपनियों की तैनाती की थी।

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