अयोध्या में बढ़ायी गयी सुरक्षा, जवानों को किया गया तैनात

army flag march

लखनऊ : दुनिया के सबसे पुराने विवाद कि सुनवाई पूरी होने के बाद से फैसले की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित होने के साथ ही अयोध्या में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने शाम को पूरे अयोध्या में फ्लैग मार्च किया। बताया जा रहा है कि हाइवे से लेकर सरयू नदी के पुल और शहर के आंतरिक मार्गों से लेकर रामकोट तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवानों को तैनात कर सुरक्षा घेरा सख्त कर दिया गया है।

40 दिन तक चली सुनवाई
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर लगातार 40 दिन तक चली देश के इतिहास की दूसरी सबसे लंबी सुनवाई के बाद बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। बताया जा रहा है कि फैसला 17 नवंबर तक आ सकता है। वहीं, अयोध्या पर मध्यस्थता पैनल सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंप चुका है।

बैरियर लगा दिए गए
पुलिस प्रशासन ने नब्बे के दशक में चरम पर रहे मंदिर आन्दोलन के दौरान कारसेवकों की भीड़ को रोकने के लिए बनाए सभी सुरक्षा चौकियों को फिर से पुनर्जीवित कर दिया है। अयोध्या में जगह-जगह पुलिस ने बैरियर लगा दिए हैं। गाड़ियों को रोककर लोगों की तलाशी ली जा रही है। इसके अलावा रामकोट क्षेत्र में बिना पास वाले वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से निषिद्ध हो गया है। जुलाई 2005 में हुई आतंकी घटना के बाद से रामकोट में मंगलवार व शनिवार को चार पहिया वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया था लेकिन समय के साथ इस व्यवस्था को शिथिल कर दिया गया। अब एक बार पुन: उसी व्यवस्था को नए रूप में सामने लाया गया है और सभी बैरियरों की मरम्मत कराकर उन पर पुलिस के जवानों की तैनाती कर दी गई है।

मुख्यमंत्री आएंगे दिवाली मनाने
गौरतलब है कि यहां प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दीवाली मनाने आने वाले हैं, ऐसे में भी सुरक्षा व्यवस्‍था कड़ी की गई है। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह का कहना है, ‘सुरक्षा की व्यवस्था व्यापक होगी क्योंकि इस साल यह कार्यक्रम विशाल स्तर पर किया जा रहा है पिछली बार भी हम लोगों ने किया था। पैरा मिलिट्री फोर्स, पीएसी, पुलिस सभी की व्यवस्था होगी।’ अयोध्या में सुरक्षा का जायजा लेने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, डीजीपी, एडिशनल चीफ सेक्रेट्री (लॉ एंड ऑर्डर) ने भी अयोध्या का दौरा किया है।

तीन दिन का समय मिला
बता दें, सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर छह अगस्त से रोजाना 40 दिन तक सुनवाई की। इस दौरान विभिन्न पक्षों ने अपनी अपनी दलीलें पेश कीं। संविधान पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुये संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील जमा करने के लिये तीन दिन का समय दिया।

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