महिलाओं के प्रवेश पर विवाद के बीच खुले सबरीमाला के कपाट, सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए गए

Sabarimala Temple

तिरुवनंतपुरम : केरल स्थित सबरीमाला मंदिर के द्वार शनिवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। श्रद्धालुओं के मंदिर के कपाट अगले 2 महीनों के लिए खुले रहेंगे। शनिवार को मंदिर में मंडला पूजा की शुरुआत हो जाएगी। हालांकि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद जारी है। जिसके चलते मंदिर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और करीब 25000 पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई हैं।

महिलाओं को सुरक्षा देने से राज्य सरकार ने किया इन्कार

केरल सरकार द्वारा सबरीमाला मामले में इसके पूर्व यह बयान दिया गया था कि पब्लिसिटी के लिए सरकार मं‌दिर में आने वाली महिलाओं का समर्थन नहीं करती है। राज्य के पर्यटन और देवस्वोम मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने कहा कि सबरीमाला पूजा का स्‍थल है न कि प्रदर्शन का। तृप्ति देसाई जैसी कार्यकर्ताओं द्वारा अपने शक्‍ति प्रदर्शन के लिए यहां पर कोई जगह नहीं है। लोकप्रियता के उद्देश्य से पूजा स्‍थल पर प्रदर्शन करने आए किसी भी व्यक्ति के प्रवेश का समर्थन राज्य सरकार नहीं करेगी।

राज्य सरकार ने सबरीमाला मंदिर के दर्शन करने की बात कहने वाली महिला सामाजिक कार्यकर्ता को पुलिस सुरक्षा देने से साफ इन्कार कर दिया। मंत्री के. सुरेंद्रन ने कहा था कि हम उन्हें अंदर नहीं ले जाएंगे। वे न्यायालय का आदेश लेकर आएं।

राज्य सरकार फैसले को लागू करने के लिए बाध्य नहीं

बताया जा रहा है कि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और कानून सचिव की सलाह के बाद राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय के फैसले को लागू करने के लिए बाध्य नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस विषय पर उच्चतम न्यायालय के सेनानिवृत्त न्यायाधीशों से भी चर्चा करेगी।

20 नवंबर के बाद हम जाएंगे

उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने कहा था कि 2018 में सबरीमाला पर दिए फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा सुरक्षा चाहे मिले या नहीं लेकिन 20 नवंबर के बाद हम वहां जाएंगे। जो लोग हमें पुलिस सुरक्षा केे लिए न्यायालय से आदेश लाने के लिए कह रहे हैं वे स्वयं न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की सलाह लेना आवश्यक

केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने गुरुवार को सबरीमाला पर उच्च न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद इस मामले में कानूनी राय लेने का निर्णय लिया था। विजयन ने कहा था, “सुप्रीम कोर्ट जो कहेगा सरकार उसे लागू करेगी। हम समझते हैं कि 28 सितंबर 2018 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभी भी लागू है, लेकिन इस फैसले का निहितार्थ स्पष्ट नहीं हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की सलाह लेना आवश्यक है जिसके लिए और समय चाहिए।”

महिलाओं पर प्रतिबंध है असंवैधानिक

बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश संबंधित मामले पर सुनवाई करते हुए इसे सात जजों वाली वृहद पीठ को विचार के लिए सौंप दिया है। न्यायालय ने 28 सितंबर 2018 के फैसले को बरकरार रखते हुए मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध से इनकार कर दिया है। 4 के मुकाबले एक के बहुमत से यह फैसला दिया गया था जिसके तहत केरल के सुप्रसिद्ध अयप्पा मंदिर में 10 वर्ष से 50 की आयुवर्ग की लड़कियों एवं महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की इस सदियों पुरानी धार्मिक प्रथा को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया था।

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