एनआरसी भविष्य के लिए आधार दस्तावेज,मीडिया की गैर जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग ने बिगाड़े हालात- सीजेआई गोगोई

CJI Gogoi

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स, एनआरसी) को भविष्य के लिए आधार दस्तावेज बताया है। भारत के सीजेआई गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने ‘पोस्ट कॉलोनियल असम’ किताब के विमोचन कार्यक्रम के दौरान एनआरसी का समर्थन किया। इसके साथ ही उन्होंने एनआरसी लागू किए जाने के दौरान बिगड़े हालातों का जिम्मेदार कुछ मीडिया संस्थानों की गैर जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग को बताया।

यह भविष्य के लिए मूल दस्तावेज है
उन्होंने कहा है कि ‘यह चीजों को उचित नजरिए से रखने का एक अवसर है, एनआरसी जैसा कि अंतिम रूप से उभर कर सामने आया है, यह वर्तमान के लिए दस्तावेज नहीं है। 19 लाख या 40 लाख का विषय नहीं है। ये भविष्य के लिए मूल दस्तावेज है।’ बता दें कि जस्टिस गोगोई ने एनआरसी पर अपना रूख तब साफ किया है, जब आने वाले 17 नवंबर को वे अपने पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

अवैध प्रवाशियाें की संख्या के बारे में पता चलेगा
जस्टिस गोगोई ने कहा- इससे पहले राज्य में अवैध प्रवासियों की संख्या के बारे में केवल अनुमान लगाया जाता था। इसके चलते राज्य में घबराहट, भय, अराजकता और हिंसा का दौर शुरु हो गया था। जस्टिस गोगोई ने कहा कि एनआरसी कोई नया या अद्भुत विचार नहीं है। 1951 में ही इस पर काम किया जा चुका है और वर्तमान एनआरसी केवल 1951 के आंकड़ों को सटीक और सुव्यवस्थित करने का माध्यम है।

आग से खेल रहे है कुछ लोग
उन्होंने कहा, “यह सार्वजनिक तौर पर कहने की जरूरत है कि जिन लोगों ने एनआरसी और इसे लागू करने की समय सीमा पर आपत्ति जताई, वो आग से खेल रहे हैं। काम करने वाली संस्थाओं से जवाबदेही की मांग करने की आदत पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। उद्देश्य स्पष्ट है, अवैध प्रवासियों की संख्या जानने के लिए एक प्रक्रिया तय होनी बहुत जरूरी थी, जो वर्तमान एनआरसी के जरिए हो रही है। न इससे कम, न इससे ज्यादा। एनआरसी इसके लिए सबसे शांतिपूर्ण तरीका है। इसके जरिए राज्य के लोग क्षेत्र की संस्कृति और समुदाय को प्रभावित करने वाली गलतियों को सुधारने की उम्मीद रखते हैं। ”

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