कैब के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पहली याचिका दाखिल

नई दिल्ली : नागरिकता संशोधन विधेयक(कैब) के लोकसभा में पारित होने के बाद भी इसका विरोध जारी है। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न से परेशान होकर भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के चार सांसदों ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ गुरुवार को उच्चतम न्यायालय में पहली याचिका दाखिल की है। सासंदों ने अपनी याचिका में कहा कि धर्म के आधार पर वर्गीकरण की मंजूरी हमारा संविधान नहीं देता। कैब संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है जिस कारण इस विधेयक को रद्द किया जाना चाहिए। याचिका में इसकी संवैधानिकता पर सवाल खड़े किए हैं। मालूम हो कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल मुस्लिम लीग की ओर से पैरवी करेंगे।

संविधान के मूल भावना के खिलाफ

विधेयक का विरोध मुस्लिम लीग के सासंद पीके कुनहालकुट्टी ने करते हुए कहा कि यह संविधान के मूल सिद्धांतों और भावनाओं के खिलाफ है। धर्म के आधार पर किसी को भी इसे नष्ट नहीं करने दिया जाएगा। कुनहालकुट्टी नं बताया कि उनके दल ने नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ याचिका दायर कर दी है। उन्होंने कहा कि कैसे किसी अवैध घुसपैठ को मान्यता देकर नागरिकता प्रदान किया जा सकता है। हमारे वकिल कपिल सिब्बल है। आईयूएमएल ने कैब के पारित होने के बाद इसे काला दिन बताया। वहीं दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक मुस्लिमों के खिलाफ है। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक हिंदू, सिख, जैन, पारसी, ईसाई और बौद्ध शरणार्थियों को भारत की नागरिकता हासिल करने में आसानी होगी।

भारतीय मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इस विधेयक का मकसद तीन देशों से आए अल्‍पसंख्‍यक शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देना है। मैं यह भी साफ तौर पर बताना चाहता हूं कि इस बिल से किसी की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी और भारतीय मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं हैं। वहीं कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने अपने बयान में कहा कि विधेयक का पारित होना भारत के संविधान के लिए काला दिन है। उन्होंने इसे देश के बहुलवाद पर छाेटी मानसिकता की जीत बताई है। राज्यसभा में विधेयक पारित होने के तुरंत बाद ही उन्होंने अपने बयान में कहा कि बिल संविधान में मिले समानता के अधिकार और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करने के खिलाफ है।

गौरतलब है कि राज्यसभा में बुधवार को कैब पर देर रात तक चर्चा के बाद विधेयक के पक्ष में 125 वोट पड़े और विरोध की ओर से 105। वहीं दूसरी ओर लोकसभा में विधेयक के पक्ष में 311 वोट पड़े थे।

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