पेश हुआ नागरिक संशोधन बिल, शाह बोले- बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं

नई दिल्ली : केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश कर दिया है। इस बिल को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में शुन्यकाल के दौरान सदन के सामने रखा। सदन में नागरिकता संशोधन बिल पेश होने के बाद विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया जिस पर शाह ने कहा कि यह बिल देश के किसी भी अल्पसंख्यक के खिलाफ नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब बिल सदन में चर्चा के लिए आएगा तो मैं आपके हर सवाल का जवाब बिना टाले दूंगा। शाह ने तंज कसते हुए विपक्ष से कहा कि सदन से वॉकआउट मत करना। विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह बिल और कुछ नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों पर एक लक्षित कानून है। इस पर शाह ने जवाब दिया कि यह देश के अल्पसख्यकों के 0.01 प्रतिशत भी खिलाफ नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि नागरिकता के लिए 11 साल की जगह अब भारत में 6 साल रहना होगा जरूरी।

देशभर में बिल पर विरोध प्रदर्शन

इस बिल के जरिये पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दी जा सकेगी। पार्टी रणनीतिकारों के साथ हुई बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूरी ताकत से संसद में इस बिल का विरोध करने पर मुहर लगा दी। सड़क से संसद तक इस बिल का विरोध किया जा रहा है। बिल के विरोधियों में कांग्रेस, टीएमसी समेत कई अहम विपक्षी पार्टियां भी शामिल हैं। इस बीच एआईयूडीएफ पार्टी दिल्ली के जंतर मंतर पर नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। वहीं, बिल के विरोध में असम में मंगलवार को बंद बुलाया गया है।

बीजेपी ने जारी किया व्हिप

विधेयक पेश करने को देखते हुए सत्ता में आसीन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने सभी लोकसभा सदस्यों को नौ दिसम्बर से तीन दिनों तक सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया। लोकसभा के सोमवार की कार्य सूची के मुताबिक छह दशक पुराने नागरिकता कानून में संशोधन वाला विधेयक दोपहर में लोकसभा में पेश किया गया, जिस पर बाद में चर्चा कर इसे पारित कराया जाएगा। विधेयक के लोकसभा में आसानी से पारित होने की संभावना बताई जा रही है क्योंकि 545 सदस्यीय सदन में भाजपा के 303 सांसद हैं। इसके साथ ही 11 सांसद की एआईडीएमके नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन में आ गई है। बता दें कि लोकसभा के पिछले कार्यकाल के दौरान यह बिल निष्प्रभावी हो गया था।

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