क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी हो सकता है- नितिन गडकरी

Nitin Gadkari

मुंबई : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र में जारी सियासी घटनाक्रम के बीच बड़ा बयान दिया है। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रपति शासन लागू होने और मौजूदा राजनीतिक हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए गडकरी ने कहा कि क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी संभव है। कभी आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं, लेकिन परिणाम एकदम विपरीत हो जाता है। उनका इशारा शिवसेना के बीजेपी से गठबंधन तोड़ने और सरकार बनाने के लिए राकांपा-कांग्रेस से संपर्क साधने की ओर था।

परियोजनाएं जारी रहेंगी

उन्होंने कहा कि मैं अभी दिल्ली से आया हूं, जिसके कारण महाराष्ट्र की राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में पूरी जानकारी अभी नहीं है। वहीं केंद्रीय मंत्री से जब पूछा गया कि अगर महाराष्ट्र में गैर-बीजेपी सरकार बनती तो मुंबई में जारी परियोजनाओं का क्या होगा। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार बदलती है, लेकिन परियोजनाएं जारी रहती हैं। मुझे इससे कोई समस्या नहीं है। सरकार किसी की भी बने हम सकारात्मक नीतियों का समर्थन करेंगे। बता दें कि शिवसेना ने महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ अपना वर्षों पुराना नाता तोड़ दिया है और वह एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की जुगत में है।

राज्य में लागू हुआ राष्ट्रपति शासन

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 105 सीटें मिली और उसके सहयोगी शिवसेना ने 56 सीटें अपने नाम की। लेकिन आपसी मतभेद के कारण बीजेपी सरकार बनाने से चूक गई। बीजेपी के सरकार गठन करने से इनकार करने पर शिवसेना ने बहुमत के लिए जरूरी 145 विधायकों का समर्थन जुटाने की काफी कोशिश की, लेकिन उसे भी कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने तीसरे सबसे बड़े दल राकांपा (54 सीट) को संख्याबल बताने के लिए न्योता दिया था। शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस ने अपने-अपने नेताओं के साथ कई बैठक कीं। इस बीच, राज्यपाल की सिफारिश पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।

बैठकों से महाराष्ट्र में बदला सत्ता का खेल

पहली बैठक में कांग्रेस और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। वहीं दूसरी बैठक में एनसीपी और कांग्रेस के नेता शामिल हुए। इस बैठक में एनसीपी से छगन भुजबल, नवाब मलिक और कांग्रेस की तरफ से पृथ्वीराज चौहान, विजय वडेत्तीवार, माणिक राव ठाकरे शामिल हुए। इसके बाद तीसरी बैठक में तीनों पार्टियों (एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना) के नेताओं ने बातचीत की।

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