झारखंड में पकड़ा गया अलकायदा का कुख्यात आतंकी

terrorist caught in Jharkhand

रांची : झारखंड आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने शनिवार को ओसामा बिन लादेन के वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा के कुख्यात आतंकी मोहम्मद कलीमुद्दीन को जमशेदपुर रेलवे स्टेशन के पास से धर दबोचा। इस बात की जारकारी एटीएस के अतिरिक्त महानिदेशक मुरारी लाल मीणा ने दी। उन्होंने बताया कि यह मूल रूप से रांची के चान्हो के राडगांव का रहने वाला है। फिलहाल इसने जमशेदपुर के आजाद नगर को अपना ठिकाना बनाया हुआ है। बताया जा रहा है कि आतंकी कलीमुद्दीन स्‍लीपर सेल की सहायता से देश को दहलाने की साजिश रच रहा था। फिलहाल एटीएस की टीम इससे पूछताछ कर रही है।

साल 2001 में अलकायदा आतंकी संगठन से जुड़ा था

पुलिस के मुताबिक कलीमुद्दीन साल 2001 में अलकायदा आतंकी संगठन से जुड़ा और वह इनके लिए काफी बड़े ओहदे पर काम कर रहा था। इसका मुख्य काम झारखंड में स्लीपर सेल तैयार करना और जिहाद की मानसिकता रखने वाले लोगों को अलकायदा आतंकी संगठन में शामिल करना था। इसके लिए कलीमुद्दीन के खिलाफ 25 जनवरी 2016 को जमशेदपुर बिष्टुपुर थाना में आर्म्स एक्ट, सीएलए एक्ट और यूएपीए एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। वहीं संगठन की ओर से इसे अलकायदा के ईस्टर्न इंडिया जोन का प्रभारी बनाया गया था। बताया जा रहा है कि देश की सुरक्षा एजेंसियों, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) तथा पुलिस को साल 2016 से आतंकी कलीमुद्दीन की तलाश थी। पुलिस ने बताया कि अब तक यह सऊदी अरब, बांग्लादेश और अफ्रीका जैसे देशों का भ्रमण कर चुका है।

तिहाड़ में बंद आतंकियों का सहयोगी था

बता दें कि मोस्टवांटेड आतंकी कलीमुद्दीन अलकायदा के सक्रिय आतंवादी मोहम्मद अब्दुल रहमान अली उर्फ कटकी का सहयोगी है, फिलहाल कटकी तिहाड़ की चार दिवारों के अंदर कैद है। इसके अलावा कलीमुद्दीन अब्दुल सामी, अहमद मसूद, राजू उर्फ नसीम अख्तर और जीशान हैदर कुख्यात आतंकियों का भी सहयोगी है। पुलिस ने बताया कि पिछले तीन सालों से इसकी तलाश थी, लेकिन यह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था।

आजाद नगर आतंकियों का गढ़

बता दें कि जमशेदपुर का आजाद नगर आतंकियों का गढ़ है। गौरतलब है कि कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर हमला करने वाला आतंकी नूर मोहम्मद को यही से पकड़ा गया था। वहीं आतंकी अब्दुल सामी भी यहीं का रहने वाला था, जिसे दिल्ली पुलिस ने हरियाणा के मेवात से पकड़ा था। पूछताछ के दौरान शामी ने पुलिस को कई जानकारी दी थी। उसने बताया था कि साल 2014 में दुबई के रास्ते पाकिस्तान गया था, जहां उसने हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया था। उसके बाद साल 2015 में वापस भारत आया था।

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