सीएए पर लोगों को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए : नीतीश कुमार

Nitish Kumar

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर विचारों में भिन्नता हो सकती है लेकिन यह कानून संविधान के अनुरूप है या नहीं इसका फैसला सर्वोच्च न्यायालय पर छोड़ देना चाहिए।
नीतीश कुमार ने मंगलवार को यहां अपने सरकारी आवास पर जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं के साथ बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों से संबंधित बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) अब दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर कानून बन गया है। सीएए को लेकर लोगों की अलग-अलग राय देश के कई कोनों में नजर आ रही है लेकिन अब इस मुद्दे को अकारण ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय में इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गयी है इसलिए अब उसी को इस पर फैसला लेने के लिए छोड़ देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर किसी के मन में कोई शंका या प्रश्न है तो उसे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि इस विषय को लेकर समाज में अलग अलग तरह का वातावरण पैदा न करें। देश में एकता आपसी सम्मान और सद्भाव का वातावरण बना रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की बात है, इस पर वह पहले ही कह चुके हैं कि बिहार में एनआरसी का सवाल ही नहीं है। प्रधानमंत्री भी स्पष्ट कर चुके हैं कि इस तरह की कोई बात नहीं है।

 कहा : एनपीआर के लिए 2011 का पुराना तरीका ही लागू हो
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के लिए वर्ष 2011 का पुराना तरीका लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि इसके नए प्रावधानों के कारण देश में भ्रम और भय का माहौल बन रहा है, जिसे टाला जाना चाहिए। नीतीश ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के समय भी एनपीआर बनाई गई थी। इस बार एनपीआर बनाई जानी है, जो नयी बात नहीं है लेकिन इस बार इसमें कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं जिसके कारण लोगों में भ्रम और भय का माहौल बना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि माता-पिता का जन्म कहां हुआ है जैसे प्रश्नों के बारे में गरीब लोगों को शायद ही जानकारी हो। उन्हें भी अपनी मां की जन्मतिथि का पता नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी चीजों के बारे में जानकारी देना जरूरी नहीं है, यह बात तो बताई जा रही है लेकिन इसको अंकित करने की भी क्या जरूरत है? इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है इसलिए ऐसे सवालों को जोड़ने की आवश्यकता नहीं है। नीतीश ने कहा कि एनपीआर में जो पुराने प्रावधान थे, उसी आधार पर इस कार्य को किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में जिन चीजों को लेकर भ्रम और भय आ गया है, उन सब चीजों को देखकर समाधान करते हुए लोगों को राहत दिलानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में उनकी पार्टी की जो राय है उससे केंद्र सरकार को पार्टी के दोनों संसदीय दल के नेता अवगत कराएंगे।
जातीय आधार पर जनगणना कराने की मांग की
नीतीश कुमार ने जातीय आधार पर जनगणना कराने की मांग को दोहराते हुए कहा कि इस संबंध में पिछले वर्ष फरवरी में विधानसभा और विधान परिषद से एकमत से संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया गया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 1931 के बाद से जातिगत जनगणना नहीं हुई है। जातिगत जनगणना होने से कई बातें सामने आएंगी और इससे योजना बनाने में आसानी होगी। समाज में जो लोग हाशिए पर हैं उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए कितने संसाधन की और जरूरत होगी और योजनाओं के ठीक से क्रियान्वित करने के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता होगी इसके संबंध में भी जानकारी मिलेगी।

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