चिदंबरम ने भी माना, मोदी सरकार हासिल कर लेगी 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्‍था का लक्ष्य

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की अर्थव्यवस्‍था को 5 हजार अरब डॉलर (ट्रिलियन) तक पहुंचाने की बात पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मुहर लगा दी है। उन्होंने मौजूदा सरकार पर तंज कसते हुए ही सही इस बात को स्वीकार किया है। राज्यसभा में गुरुवार को आम बजट पर हुयी चर्चा में भाग लेते हुए चिदंबरम ने सरकार द्वारा पेश वर्ष 2019-20 के आम बजट में कठोर तथा ढांचागत सुधारों की कमी बताते हुए कहा कि देश की तीव्र आर्थिक प्रगति के लिए इसमें कोई स्पष्ट ‘रोडमैप’ नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि वैसे भी अर्थव्यवस्था हर 6-7 साल में दोगुनी हो जाती है। इसके लिए किसी वित्त मंत्री की भी जरूरत नहीं है।
आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों में समानता नहीं
उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने बजट भाषण में विभिन्न आंकड़े पेश नहीं किए। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री को बजट भाषण में संबंधित आंकड़े पेश करने चाहिए थे क्योंकि आम लोग बजट से जुड़े अन्य दस्तावेजों को नहीं देख पाते। चिदंबरम ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के संबंध में बजट दस्तावेजों और आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों में समानता नहीं है। साथ ही उनका यह भी कहना था कि बजट में आर्थिक वृद्धि दर 8 प्रतिशत होने की बात की गयी है जबकि आर्थिक सर्वेक्षण में यह 7 प्रतिशत तय की गयी है।
एफडीआई पर अपना कोई नियंत्रण नहीं होता
चिदंबरम ने कहा कि बजट में निवेश बढ़ाने की बात तो की गई है लेकिन उसका ब्यौरा नहीं दिया गया है। वहीं निवेश की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह दो तरह का होता है घरेलू और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई)। उनका कहना था कि एफडीआई पर अपना कोई नियंत्रण नहीं होता लेकिन घरेलू निवेश को बढ़ाने के लिए बजट पर जोर देना जरूरी होता है।
साथ ही चिदंबरम ने कहा कि पिछले कुछ सालों से घरेलू बचत की दर लगभग स्थिर रही है। उन्होंने सरकार द्वारा बजट में घरेलू बचत को प्रोत्साहित करने के लिए किसी तरह का कदम नहीं उठाए जाने पर भी चिंता जताई।
किसानों के कर्ज, शिक्षा ऋण आदि माफ नहीं किए
पूर्व वित्त मंत्री ने राजस्व का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले साल वे लक्ष्य से काफी पीछे रहे हैं लेकिन इस बार भी काफी ऊंचा लक्ष्य रखा गया है। इस क्रम में उन्होंने आयकर, सीमा शुल्क आदि का भी जिक्र किया और कहा कि मौजूदा साल के लिए जो लक्ष्य तय किए गए हैं वे अवास्तविक हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग क्षेत्र के लिए 5.55 लाख करोड़ रुपए का ऋण माफ कर दिया गया लेकिन किसानों के कर्ज, शिक्षा ऋण आदि माफ नहीं किए गए।
अर्थव्यवस्था में सुधारके लिए कठोर कदम नहीं उठाए
बता दें कि चिदंबरम ने सरकार को निशाने पर लेते हुए वह एकीकृत तस्वीर पेश करने में नाकाम रही है। वहीं उन्होंने कहा है कि बजट में ढांचागत सुधारों की बात तो की गयी है लेकिन इस संबंध में कोई विस्तृत तस्वीर पेश नहीं की गयी है। उनका यह भी कहना था कि सरकार ने भारी जनादेश मिलने के बावजूद अर्थव्यवस्था में सुधार तथा विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए कठोर कदम नहीं उठाए हैं।

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