चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 149 हुई

पटना/मुजफ्फरपुर : बिहार में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर अब 149 हो गयी है। मुजफ्फरपुर श्रीकृष्ण मेडिकल कालेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही ने बताया कि बुधवार को पांच और बच्चों की मौत हो गई। इन पांच बच्चों को मिलाकर उनके अस्पताल में मरने वाले बच्चों की संख्या अब 95 हो गयी है। उन्होंने बताया कि बुधवार को 22 और बीमार बच्चों को भर्ती कराया गया। अब तक उनके अस्पताल में एईएस के कारण भर्ती कराए गए कुल बच्चों की संख्या 372 हो गयी है। स्वास्थ्य लाभ के बाद 118 बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। वहीं निजी केजरीवाल अस्पताल में मंगलवार की रात से एईएस पीड़ित दो और बच्चे भर्ती कराए गए। बीते 24 घंटे में इस अस्पताल में एईएस से किसी भी बच्चे की मौत होने की खबर नहीं है। मंगलवार तक केजरीवाल अस्पताल में 19 बच्चों की और पूर्वी चंपारण जिले में एक बच्चे की इस रोग से मौत हुई थी। वहीं मुजफ्फरपुर के डीएम ने एईएस को लेकर सभी अधिकारियों और कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।
11 चिकित्सा अधिकारियों की मुजफ्फरपुर में की गयी तैनाती
राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा दरभंगा, सुपौल और मधुबनी के कुल 11 चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती मुजफ्फरपुर में की गयी है। इसके अलावा अन्य जिलों में तैनात तीन बाल रोग विशेषज्ञों और 12 नर्सों को मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।
चमकी बुखार मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
एईएस रोग के कारण बड़ी संख्या में बच्चों की मौत को लेकर मुजफ्फरपुर निवासी मोहम्मद नसीम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और अश्विनी कुमार चौबे तथा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एक स्थानीय अदालत में शिकायत दर्ज कराई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले की सुनवाई की तारीख 25 जून निर्धारित की है।
याचिका में मांग
सुप्रीम कोर्ट मे दाखिल जनहित याचिका में राज्य और केन्द्र सरकार को इलाज के पुख्ता इंतजाम करने का निर्देश दिये जाने की मांग की गई है। साथ ही बिहार सरकार और केन्द्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वो प्रभावितों के इलाज के लिए बिहार में करीब 500 आईसीयू और मोबाइल आईसीयू की व्यवस्था करे। निजी अस्पतालों को बीमार बच्चों का मुफ्त में इलाज करने को कहा जाए। पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
डायरिया ने भी ढाया कहर
राज्य एक तरफ अभीचमकी बुखार के प्रकोप से जूझ ही रहा है कि अब डायरिया के रूप में एक नई मुसीबत लोगों के सामने खड़ी हो गई है। नालंदा जिले के राजगीर प्रखंड के जत्ती भगवानपुर गांव में डायरिया के चलते 85 से अधिक लोग बीमार हो गए हैं। डायरिया की चपेट में बच्चे, महिलाएं और पुरुष सभी शामिल हैं। डायरिया पीड़ित लोगों को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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