कर्नाटक : बागियों के इस्तीफे पर नहीं हुआ फैसला, अदालत ने कहा- 16 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखें

speaker ramesh kumar

मुंबई/बेंगलुरु : कर्नाटक में जारी सियासी ड्रामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि राज्य सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले विधायकों के मामले में दायर की गई याचिका पर अगले मंगलवार को सुनवाई होगी। अदालत ने कहा कि  तब तक वहां यथास्थिति बनाए रखें। वहीं बागी विधायकों के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा है कि कुछ परिस्थितियों को छोड़ दें तो विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार न्यायालय के प्रति जवाबदेह हैं। साथ ही उनका यह भी आरोप है कि विधायकों के इस्तीफे पर निर्णय लेने की जगह स्पीकर प्रेस वार्ता कर रहे हैं।

स्पीकर की छवि बिगाड़ने की कोशिश

वहीं कांग्रेस और स्पीकर के पक्ष वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि बागी  विधायकों के मंसूबे कुछ अलग हैं। उनका कहना है कि इस्तीफा देने वाले विधायक अयोग्य करार दिए जाने से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि स्पीकर विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं। उनका कहना है कि स्पीकर की छवि बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। वहीं उनका यह भी कहना है कि स्पीकर विधायकों के इस्तीफों की पड़ताल करने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। मालूम हो कि सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान वकील राजीव धवन ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पक्ष रखते हुए बगावती विधायकों द्वारा स्पीकर पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से काम करने के लगाए गए आरोपों पर भी सवाल उठाया।

बागी विधायकों ने स्पीकर से मुलाकात की थी

दरअसल, कर्नाटक में सत्ता पक्ष से बगावत करने वाले विधायकों ने गुरुवार शाम 6 बजे विधानसभा स्पीकर से मुलाकात की थी, जिसके बाद वे मुंबई लौट गए। मालूम हो कि राजनीतिक संकट के समाधान के लिए सर्वोच्च अदालत के आदेश पर सत्ताधारी जेडीएस (जनता दल सेकुलर) और कांग्रेस के बागी विधायकों ने  विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की थी। वहीं उन्होंने बुधवार को स्पीकर इस्तीफा स्वीकार न करने और जानबूझ कर इस प्रक्रिया में देरी करने के आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी।

मैंने हरेक गतिविधि की वीडियोग्राफी की है – स्पीकर
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने इससे पहले याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पीकर से कहा था कि वे इस्तीफा स्वीकार कर शुक्रवार तक न्यायालय को इसकी जानकारी दें। वहीं रमेश कुमार ने भी इस बात को माना था कि सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में फैसला लेने को कहा है। उन्होंने कहा कि “मैंने हरेक गतिविधि की वीडियोग्राफी की है और इन्हें मैं अदालत को भेजूंगा।” साथ ही यह भी कहा कि “ऐसा कहा जा रहा है कि मैंने इस प्रक्रिया में बिलंब किया है जो गलत है।” उन्होंने कहा कि “गवर्नर ने मुझे 6 जुलाई को इस बात की जानकारी दी जिस वक्त मैं ऑफिस में था।” उन्होंने कहा कि किसी भी विधायक ने मुझे जानकारी नहीं दी कि वे मुझसे मिलने आ रहे हैं।” स्पीकर ने गुरुवार को कहा था कि ” विधायकों के इस्तीफे की प्रामाणिकता जांचने में मुझे रातभर का वक्त लगेगा।”

सभी विधायक विधानसभा सत्र में मौजूद रहें- कांग्रेस
वहीं कांग्रेस के नेता गणेश हुक्केरी ने सभी विधायकों से कहा था कि वे शुक्रवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में उपस्थित रहें। हुक्केरी की मानें तो इस दौरान सदन में कई महत्वपूर्ण बिल पेश किए जाएंगे, एेसे में जो भी विधायक अनुपस्थित रहेगा उसे एंटी डिफ्केशन लॉ के तहत अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

इन 16 विधायकों ने दिया इस्तीफा
बता दें कि राज्य की जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार से कांग्रेस के 13 और जेडीएस के 3 विधायकों ने इस्तीफा दिया है। इन विधायकों में उमेश कामतल्ली, रमेश जारकिहोली, बीसी पाटिल, गोपालैया , शिवाराम हेब्बर, एच विश्वनाथ, बी बस्वराज, एसटी सोमाशेखरा,नारायण गौड़ा, प्रताप गौड़ा पाटिल, मुनिरत्ना, के अलावा आनंद सिंह ने अपना इस्तीफा सौंपा है। वहीं, मंगलवार को कांग्रेस के निलंबित विधायक रोशन बेग के इस्तीफे के बाद बुधवार को के सुधाकर, एमटीबी नागराज ने भी त्यागपत्र दे दिया।

गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस के 13 और जेडीएस के 3 विधायकों के इस्तीफे के बाद  राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। वहीं त्यागपत्र देने वाले 13 में से 10 विधायकों ने सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दी थी कि उनके इस्तीफे को स्वीकार करने में देरी की जा रही है। इस मामले को लेकर शीर्ष अदालत ने स्पीकर को फटकार भी लगाई थी। साथ ही यह भी कहा था कि अदालत कर आदेश सिर्फ 10 विधायकोंपर लागू होगा, न कि 16 विधायकों पर।

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