भड़काऊ भाषण देने वाले कफील खान पर योगी सरकार ने लगाया एनएसए, रिहाई मुश्किल

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अलीगढ़ : नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध प्रदर्शन के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में विवादित बयान देने के मामले में गिरफ्तार डॉ. कफील खान के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई की है। वे शुक्रवार को जमानत पर रिहा होने वाले थे, लेकिन एनएसए लगने से अब रिहाई मुश्किल हो गई है। उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए सिविल लाइंस थाने में एनएसए के तहत मुकदमा दायर किया गया है। फिलहाल वे मथुरा जेल में कैद हैं।

‘मोटाभाई’ सबको हिंदू या मुस्लिम बनना सिखा रहे

दिसंबर महीने में सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ बयान देने के मामले में डॉ. खान पर आईपीसी की धारा 153-ए के तहत सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि खान ने छात्रों को संबोधित करने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का नाम लिए बिना ही कहा कि ‘मोटाभाई’ सबको हिंदू या मुस्लिम बनना सिखा रहे हैं लेकिन इंसान बनना नहीं सिखा रहे। जब से आरएसएस का उदय हुआ है, संविधान पर से उनका भरोसा उठ गया है। सीएए मुस्लिमों को दूसरी श्रेणी का नागरिक बनाता है और जैसे ही देश में एनआरसी लागू होगा, लोगों को परेशान किया जाएगा।’

जो लोग दाढ़ी रखते हैं, वे आतंकवादी होते हैं

डॉ. कफील ने आगे कहा था, ‘यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है और हमें ही इसे लड़ना होगा। आरएसएस के स्कूलों में बच्चों को यह पढ़ाया जाता है कि जो लोग दाढ़ी रखते हैं वे आतंकवादी होते हैं। ‘ साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सीएए लाकर सरकार यह साबित करना चाहती है कि भारत एक देश नहीं है। उनके खिलाफ दर्ज शिकायत में लिखा गया है कि खान ने अपने बयान से माहौल की शांति भंग करने का प्रयास किया है।

60 बच्चों की मौत के मामले में कफील हुए थे निलंबित

गौरतलब है कि खान के खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया था। इस मामले में डॉक्टर कफील खान के वकील ने न्यायालय में उनकी जमानत की अर्जी डाली थी, जिस पर 10 फरवरी को सीजेएम न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी। लेकिन एनएसए लगने के बाद अब उनकी रिहाई मुश्किल है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए)-1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने की शक्ति देता है। बता दें कि कुछ समय पहले गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 60 बच्चों की मौत के मामले में डॉक्टर कफील खान को निलंबित किया गया था। हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी।

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