ट्रंप ने छठी बार की मध्यस्थता की पेशकश, भारत-पाक को विवाद सुलझाने ही होंगे

donald trump

वॉशिंगटन : जम्मू कश्मीर पर मध्यस्थता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बयान दिया है कि कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत और पाकिस्तान में माहौल गंभीर हो गया है। व्हाइट हाउस में चल रहे संवाददाता सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि वे दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए कुछ भी करने को तैयार है। ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा, “मेरी भारत और पाकिस्तान दोनों से कश्मीर मुद्दे पर बात हुई। विवाद सुलझाने के लिए मैंने उन्हें मध्यस्थता की पेशकश की। मैंने कहा कि मैं कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए कुछ भी करूंगा, क्योंकि दोनों पड़ोसी गंभीर रूप से आमने-सामने हैं। उम्मीद है कि यह स्थिति जल्द ही बेहतर होगी।” गौरतलब है कि सोमवार को इमरान के साथ मुलाकात के दौरान भी उन्होंने खुद को बेहतर मध्यस्थ बताते हुए कहा था कि भारत-पाक चाहेंगे तो वे मदद के लिए तैयार हैं। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से यह छठी बार है जब ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की है।

हमारी ओर से स्थिति साफ है

वहीं ट्रंप के बयान पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि मध्यस्थता को लेकर भारत पहले ही अपनी स्थिति साफ कर चुका है। रवीश ने कहा, ‘ट्रंप ने कल भी कहा था कि भारत और पाकिस्तान दोनों को किसी भी तरह की मध्यस्थता के लिए सहमत होना चाहिए। हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है, यह पहले ही प्रधानमंत्री की ओर से बताई जा चुकी है। यह स्थिति अब भी बनी हुई है।’

दोनों के अलग-अलग विचार हैं

हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने जम्मू कश्मीर मुद्दे को लेकर मध्यस्थता करने की बात कही हो। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में अपने भाषण से ठीक पहले ट्रंप ने भारत और पाक के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश कर चुके है। मंगलवार को भाषण से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है, जहां तक पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत करना चाहता है, मैं चाहता हूं कि मैं मदद करूं। लेकिन तभी, जब वे इसके लिए तैयार हों। उन दोनों के अलग-अलग विचार हैं। मैं इस पर बहुत चिंतित हूं।’

बयान बदलते रहे हैं ट्रम्प
अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार कश्मीर मुद्दे पर बयान बदलते रहे हैं। सोमवार को इमरान के साथ मुलाकात में उन्होंने कहा था कि अगर भारत और पाकिस्तान दोनों राजी हों तो वे कश्मीर पर मध्यस्थता करेंगे। हालांकि, अगले दिन प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद ट्रम्प ने भरोसा जताते हुए कहा था कि मोदी और इमरान इस मसले को सुलझा सकते हैं।

हस्तक्षेप के खिलाफ रहा है भारत
मालूम हो कि भारत ने पहले भी कई बार ट्रम्प की मध्यस्थता की पेशकश को ठुकरा चुकी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 समिट में ट्रंप से मुलाकात के दौरान कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को गैरजरूरी बताया था। साझा संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने ट्रम्प के सामने दो टूक कहा था कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है और हम दुनिया के किसी भी देश को इस पर कष्ट नहीं देना चाहते। इस पर ट्रम्प ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि कश्मीर में हालात भारत के नियंत्रण में हैं।

दो महीने पहले मध्यस्थता की बात

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहली बार  22 जुलाई को ट्रंप ने पाक प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी। बता दें कि उन्होंने यही प्रस्ताव 2 अगस्त, 23 अगस्त और 10 सितंबर को दोहराया था। इमरान के अमेरिका दौरे पर ट्रम्प ने कहा था कि मोदी दो हफ्ते पहले उनके साथ थे और उन्होंने कश्मीर मामले पर मध्यस्थता की पेशकश की थी। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर ट्रम्प के दावे को गलत बताया था।

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