सरकारी मेडिकल कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए ग्रामीण क्षेत्र में सेवा नियम बनाए केंद्र : शीर्ष न्यायालय

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नई दिल्ली : शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को ‌आदेश देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टरों की सेवा अनिवार्य करने का नियम बनाए जाए। कई राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेज में पीजी की पढ़ाई के लिए प्रवेश लेनेवाले छात्रों के लिए ग्रामीण इलाकों में सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया है। अदालत ने कहा कि उक्त कॉलेज से पढ़नेवाले छात्रों के लिए ऐसा कानून बनाया जाए जिसके तहत एक तय सीमा तक ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में उनका सेवा देना अनिवार्य हो।

1 से 5 वर्ष तक करना होगा जन सेवा

जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने व्यापक जनहित और चिकित्सा सेवा से वंचित समुदाय को लाभ पहुंचाने के मद्देनजर विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा डॉक्टरों को कोर्स पूरा करने के बाद 1 से 5 वर्ष तक के लिए जन सेवा करने संबंधी बॉन्ड थोपने को सही करार दिया है।

राज्यों में नहीं है एकरूपता

इस नियम को कई राज्यों में लागू किए गए हैं, लेकिन सभी राज्यों में इस नियम की एकरूपता नहीं है। कहीं अनिवार्य सेवा की अवधि 2 से 5 साल तक है तो कहीं बॉन्ड तोड़ने की दिशा में लिया जानेवाला पेनल्टी भी अलग-अलग है। कुछ राज्यों में पेनल्टी 50 लाख है तो कुछ राज्यों में यह उससे कम है। कोर्ट ने न्यूनतम सेवा अवधि 2 साल तक की तय की है और पेनल्टी 20 लाख रुपये की है।

छात्रों को कई राज्य में बॉन्ड साइन करना अनिवार्य

कई राज्यों ने यह नियम बनाया है कि सरकारी कॉलेज में प्रवेश लेनेवाले छात्रों को दाखिले के समय ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देना अनिवार्य होगा। सरकारी कॉलेजों में पोस्टग्रैजुएट और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में दाखिले के समय छात्रों को बॉन्ड भरना होता है। इस बॉन्ड के तहत कोर्स समाप्त होने पर छात्र सरकारी अस्पताल और हेल्थ सेंटर में अपनी सेवाएं देंगे।

इन राज्यों में यह नियम लागू

अब तक आंध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और बंगाल में यह नियम अनिवार्य है। इन राज्यों के सरकारी कॉलेजों से पढ़नेवाले छात्रों को सरकारी अस्पतालों, हेल्थ सेंटरों और ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देना अनिवार्य है।

अदालत ने केंद्र को दिया कानून बनाने का निर्देश

अदालत ने विभिन्न राज्यों में भिन्न-भिन्न कानूनों को देखते हुए केंद्र सरकार को एक निश्चित कानून बनाने का निर्देश देते हुए कहा कि ‘इस नीति का यही लक्ष्य है कि वंचित समुदाय के लोगों को न्यूनतम स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इसमें शक नहीं है कि अनिवार्य सेवा शर्त को प्रभावी बनाने के लिए सरकार नए अस्पताल और हेल्थ सेंटर खोलने पर जोर दे रही है। इसके लिए जरूरी है कि इन स्वास्थ्य केंद्रों तक प्रत्येक आम आदमी की पहुंच भी सुनिश्चित हो।’

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