कर्नाटक में सियासी संकट जारी, कुमारस्वामी सरकार आज साबित करेंगे बहुमत

बेंगलुरु : कर्नाटक में चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच साेमवार को प्रदेश की कुमारस्वामी सरकार विधानसभा में बहुमत साबित करेगी। मालूम हो कि इससे पहले शुक्रवार को भी सत्ता पक्ष बहुमत साबित करने सदन में पहुंचा था, लेकिन बहुमत सिद्ध करने की कवायद पूरी नहीं हो पाई थी। बाद में विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार ने 15 बागी विधायकों को अयोग्यता के मुद्दे पर नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही स्पीकर ने इन विधायकों को 23 जुलाई को 11 बजे दिन में अपने कार्यालय में तलब किया है। वहीं कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही शुरु होने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया सोमवार को ही पूरा करने पर जोर दिया।

याचिका पर शीघ्र सुनवाई से इंकार

दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायालय ने 2 निर्दलीय विधायकों द्वारा दायर याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। मालूम हो कि कांग्रेस-जेडीएम (जनता दल सेकुलर) गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने वाले 2 निर्दलीय विधायकों ने शीर्ष अदालत से मांग की थी कि शाम 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट संपन्न कराया जाए।

विश्वास मत प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है

वहीं बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कर्नाटक के इकलौते बसपा विधायक एन महेश को कुमारस्वामी सरकार का समर्थन करने को कहा है। दरअसल, एन महेश ने फ्लोर टेस्ट के दौरान खुद को अलग रखने की बात कही थी। साथ ही वे विश्वास मत प्रस्ताव पर बहस के दौरान भी सदन में अनुपस्थित रहे। बता दें कि विधानसभा में कुमारस्वामी के विश्वास मत प्रस्ताव पर गुरुवार और शुक्रवार को चर्चा हो चुकी है।

कुमारस्वामी सरकार का अंतिम दिन

वहीं राज्य में सत्ता पर काबिज होने को आतुर भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि सोमवार को कुमारस्वामी सरकार का अंतिम दिन होगा। मालूम हो कि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने रविवार को अपने विधायकों के साथ ताज होटल में बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में अनैतिक राजनीति करने का यह भाजपा का की नई परिपटी है। बात करे बागी विधायकों की तो उनका कहना है कि ”हमारा मकसद केवल गठबंधन (कांग्रेस-जेडीएस) सरकार को सबक सिखाना है इसलिए हम यहां आए हैं।” उन्होंने कहा कि हम पैसे या किसी अन्य चीज के लालच में नहीं आए। उनका यह भी कहना है कि सबकुछ ठीक हो जाने के बाद वे बेंगलुरु लौट आएंगे।

दिल्ली द्वारा निर्देशित नहीं हो सकता- कुमारस्वामी

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा में कुमार सरकार को बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल वजुभाई वाला ने शुक्रवार दोपहर 1.30 बजे और फिर शाम 6 बजे तक समय सीमा दी थी। कुमारस्वामी ने राज्यपाल के निर्देश के बावजूद इस दिन विश्वास मत साबित नहीं किया। उनका कहना था कि कि ”मेरे मन में राज्यपाल के लिए इज्जत है, लेकिन उनके दूसरे प्रेम पत्र ने मुझे दुखी किया है। मैं फ्लोर टेस्ट का निर्णय स्पीकर पर छोड़ता हूं।” साथ ही उनका कहना था कि मैं दिल्ली द्वारा निर्देशित नहीं हो सकता। मेरी स्पीकर से अपील है कि राज्यपाल की ओर से भेजे गए पत्र से मेरी रक्षा करें।

जेडीएस ने जारी किया था व्हिप

मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने जनता दल सेकुलर के सभी 37 विधायकों को विधानसभा में उपस्थित करने को व्हिप जारी किया था। पार्टी के 3 बागी विधायक नारायण गौड़ा, गोपालैया और एच विश्वनाथ को व्हिप भी जारी किया गया था। पार्टी का कहना है कि यदि बहुमत साबित करने के समय विधायक सदन में अनुपस्थित रहते हैं या वे विश्वास मत के विरुद्ध मतदान करते हैं तो उन्हें दल बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराया जायेगा। वहीं पार्टी से त्यागपत्र दे चुके कांग्रेस विधायक रामलिंगा रेड्डी का कहना है कि वे पार्टी में हैं और सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे।

गौरतलब है कि कर्नाटक की गठबंधन सरकार से उमेश कामतल्ली, बीसी पाटिल, रमेश जारकिहोली, शिवाराम हेब्बर, एच विश्वनाथ, गोपालैया, बी बस्वराज, नारायण गौड़ा, मुनिरत्ना, एसटी सोमाशेखरा, प्रताप गौड़ा पाटिल, मुनिरत्ना और आनंद सिंह के इस्तीफा सौंपने के बाद से वहां सरकार के अस्तित्व पर संकट के बादल छाए हुए हैं। विधायकों के बगावत को देखते हुए कांग्रेस के निलंबित विधायक रोशन बेग ने भी त्यागपत्र दे दिया था। इस घटनाक्रम के बीच गत 10 जून को दो निर्दलीय विधायकों के सुधाकर, एमटीबी नागराज ने भी इस्तीफा दे दिया था।

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