मायावती ने कांग्रेस को कहा धोखेबाज पार्टी,राजस्‍थान के सभी 6 विधायक कांग्रेस में शामिल

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जयपुर : राजस्थान में मायावती को बड़ा झटका लगा है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सभी छह विधायक सोमवार की रात को कांग्रेस में शामिल हो गए। गौरतलब है कि बसपा के सभी विधायक अब तक बाहर से कांग्रेस को समर्थन दे रहे थे। इसके बाद विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या 100 से बढ़कर 106 हो गई है।

धोखेबाज पार्टी होने का प्रमाण दिया

इस पर बसपा प्रमुख मायावती ने ट्वीट किया, ‘‘राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार ने एक बार फिर बीएसपी के विधायकों को तोड़कर गैर-भरोसेमन्द व धोखेबाज पार्टी होने का प्रमाण दिया है। यह बीएसपी मूवमेन्ट के साथ विश्वासघात है जो दोबारा तब किया गया है जब बीएसपी वहाँ कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी।’’

कांग्रेस में विलय का पत्र सौंपा गया

बता दें कि बसपा विधायक सोमवार रात 9:30 बजे पहले मुख्यमंत्री गहलोत से मिले। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से मिलकर देर रात कांग्रेस में विलय का पत्र सौंपा। विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने कहा कि सभी विधायकों का कांग्रेस में विलय पत्र मिल चुका है। इसके साथ ही उनके इस विलय को जोशी ने मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा कि अब इसमें किसी प्रकार की कानूनी अड़चन नहीं है। इसके बाद तमाम बसपा विधायक रात 11 बजे राजस्थान यूनिवर्सिटी स्थित गेस्ट हाउस पहुंचे और विलय का औपचारिक ऐलान किया।

बसपा विधायकों का यह फैसला स्वागत योग्य है

मालूम हो कि उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट इस पूरे घटनाक्रम से दूर रहे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, “प्रदेश को नए विकास पथ पर ले जाएंगे स्थायी सरकार के लिए राज्यहित में बसपा विधायकों का यह फैसला स्वागत योग्य है। उनकी भावनाएं अच्छी हैं। हम सब मिलकर राजस्थान को विकास के नए पथ पर ले जाएंगे।” आपको बता दें कि इससे पहले, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2009 में भी इसी तरह बसपा के छह विधायकों को पार्टी में शामिल किया था।

ये 6 विधायक शामिल हुए

जानकारी के अनुसार , राजेन्द्र गुढा (उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (नदबई), वाजिब अली (नगर), लाखन सिंह मीणा (करोली), संदीप यादव (तिजारा) और दीपचंद खेरिया ने कांग्रेस की सदस्यता ली।बीएसपी विधायकों के कांग्रेस में विलय से प्रदेश की गहलोत सरकार और अधिक मजबूत और स्थिर हो जाएगी। प्रदेश की 200 सीटों वाली विधानसभा में अभी कांग्रेस के 100 विधायक हैं और उसके सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल के पास एक विधायक है। सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को 13 निर्दलीय विधायकों में से 12 का बाहर से समर्थन प्राप्त है जबकि दो सीटें खाली हैं।

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